For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ

रणभेरी बजने से पहले अच्छा है तुम घर जाओ
वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ

कितनी ही आशाएं तुमसे लगी हुई है, टूटेंगीं
कितनी ही तकदीरें तुमसे जुड़ी हुई हैं, रूठेगीं


तेरे पीछे मुड़ जाने से कितने सिर झुक जाएंगे
कितने प्राण कलंकित होंगे कितने कल रुक जाएंगे


उतर गए हो बीच समर तो कौशल भी दिखला जाओ
हिम्मत के बादल बन कर तुम विपदाओं पर छा जाओ

तप कर और प्रबल बनकर तुम शोलों बीच सँवर जाओ
वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ 

आशीष यादव 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 295

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on May 31, 2021 at 11:19pm

आदरणीय श्री Chetan Prakash  सर प्रणाम,
सर मैंने केवल अपने मनोभावों को कलमबद्ध करने की कोशिश की है। मुझे 'नगमा' इत्यादि के बारे में जानकारी नहीं है।
आपसे प्रार्थना है कि कृपया उचित मार्गदर्शन करें।

Comment by आशीष यादव on May 31, 2021 at 11:13pm

आदरणीय श्री Aazi Tamaam सर, बहुत बहुत धन्यवाद। 

Comment by आशीष यादव on May 31, 2021 at 11:12pm

आदरणीय श्री लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  सर कविता पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on May 31, 2021 at 2:42pm

जनाब आशीष जी आदाब, रचना का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

ये रचना किस विधा में है? बताने का कष्ट करें ।

Comment by Chetan Prakash on May 29, 2021 at 1:32pm
  • आदाब, भाई, आशीष  ! रचना  को आप अपने मन से  ही 'नगमा' कह रहे हैं, अथवा कोई  माडल दृष्टिगत  रखकर  आपने अपनी  रचना  का नाम करण 'नगमा  किया  है ! मैंने  कम से कम इस  फार्मेट  कोई  नगमा  नहीं देखा ! कृपया मार्ग दर्शन करें !
Comment by Aazi Tamaam on May 28, 2021 at 9:08am

सुंदर रचना है सहृदय बधाई आ आशीष जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 28, 2021 at 8:53am

आ. भाई आशीष जी, वीररस की सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
11 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय सुशील सरना जी"
12 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
" शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी "
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब
"हार्दिक बधाई आदरणीय मुसाफ़िर जी। लाजवाब ग़ज़ल। "
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ बजेगा भोर का इक दिन गजर आहिस्ता आहिस्ता  सियासत ये भी बदलेगी मगर आहिस्ता…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन दोहे हुए हैं ।हार्दिक बधाई।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत ख़ूब दोहा त्रयी हुई है। विशेष कर प्रथम एवं तृतीय दोहा शानदार हैं।…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

धक्का

निर्णय तुम्हारा निर्मलतुम जाना ...भले जानापर जब भी जानाअकस्मातपहेली बन कर न जानाकुछ कहकरबता कर…See More
yesterday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० सौरभ भाई जी, जन्म दिवस की अशेष शुभकामनाएँ स्वीकार करें। आप यशस्वी हों शतायु हों।.जीवेत शरद: शतम्…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . . . .

दोहा त्रयी. . . . . . ह्रदय सरोवर में भरा, इच्छाओं का नीर ।जितना इसमें डूबते, उतनी बढ़ती पीर…See More
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के)

1121 -  2122 - 1121 -  2122 जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के वो रगों में दौड़ते हैं…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. भाई सौरभ जी, आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ।"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service