For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

जिंदगी
जीती रही
मिट जाने के बाद भी
जिंदगी के लिए
कैद में
निर्जीव फ्रेम के
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
लगा देती है
जिन्दगी
आंखों की चौखट पर
सांकल
हर प्रतीक्षा की
सांसो से
अनबन
होने के बाद
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हो गया
गिलास खाली
पानी
बिखर जाने के बाद
थी
फिर भी उसमें
शेष
थोड़ी सी
नमी
अनदेखी
जिन्दगी की

.............................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 63

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on October 2, 2020 at 2:29pm

आदरणीय  Dr. Vijai Shanker जी सृजन के भावों को अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से समृद्ध करने का दिल से आभार।

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 2, 2020 at 9:16am

सुन्दर क्षणिकाएं आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई। सादर।

Comment by Sushil Sarna on September 24, 2020 at 6:26pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार ।
Comment by Sushil Sarna on September 24, 2020 at 6:25pm
आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 23, 2020 at 6:33pm

आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on September 23, 2020 at 11:56am

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ॰  नीलेश जी, लगता है: 'तुमको भी तो बात अपनी कहने  आनी चाहिए', होगा…"
11 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी,यह शायर पर निर्भर है कि वो दर्शक चाहते हैं या श्रोता... अगर दर्शक चाहिए तो वहां क़िस्सा…"
28 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी इसलिए इस देश को ये चाहते हैं बाँटनाक्यूँ कि हर नेता को अपनी राजधानी…"
32 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया अंजलि जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, तीसरा शेर कमाल हुआ है छठे शेर…"
44 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद . नीलेश जी 'इसलिए' कहने पर तकाबुल रदीफ़ हो जाएगा"
48 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमित जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, पांचवां शेर कमाल हुआ है आदरणीय।"
48 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, ख़ासतौर पर छठा और…"
50 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद. सालिक गणवीर जी उत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद "
52 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"2122       2122       2122      212 है…"
55 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद. नीलेश जी संज्ञान हेतु साधुवाद !"
56 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद नीलेश जी इस ऊला में किस्सा से बेहतर नाटक होगा क्या !"
59 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर जी.आपका नम्बर नहीं लग रहा है."
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service