For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मान और सम्मान की,नहीं कलम को भूख
महक  मिटे  ना पुष्प  की , चाहे जाये सूख |

 

खानपान  जीवित  रखे , अधर रचाये पान
जहाँ  डूब कान्हा मिले , ढूँढो वह रस खान |

 

दीपक पलभर जल बुझे, नित्य जले आदित्य
सकल जगत जगमग करे,कालजयी साहित्य |

 

अलंकार  रस  छंद  के , बिना  कहाँ रस-धार
बिन  प्रवाह  कविता  नहीं गीत  बिना  गुंजार |

 

अक्षर - अक्षर चुन सदा, शब्द गठरिया बाँध
राह दिखाये व्याकरण , भाव लकुठिया काँध |

 

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (म.प्र.)

Views: 843

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by UMASHANKER MISHRA on September 13, 2012 at 9:33am

आदरणीय प्रिय अरुण जी 

खानपान जीवित रखे अधर रचाए पान ..यह सही है कि जीवित रहने के लिए भोजन जरुरी है 

परन्तु पान खाने से पेट नहीं भरता पान से अधर ही रचाए जा सकते है 

एक साहित्य प्रेमी की  क्या तृष्णा हो सकती है... मान और सम्मान की,नहीं कलम को भूख 

अलंकार  रस  छंद  के , बिना  कहाँ रस-धार
बिन  प्रवाह  कविता  नहीं गीत  बिना  गुंजार |

बहुत बढ़िया... क्या बात है... क्या बात है... 

हार्दिक बधाई 

Comment by dheerendra singh bhadauriya on September 12, 2012 at 10:39pm

दोहा बिन रस छंद के,खाते नहीं है मेल
दिया कभी जलता नही,बाती बिना न तेल,,,,

अरुणजी,,,भावपूर्ण दोहे लिखने में आपका जबाब नही,,,,बधाई

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 12, 2012 at 4:48pm

आदित्य नगर के अरुण कुमार निगम जी, सलाम | सचमुच कालजयी साहित्य 

सकल विश्व को जगमग कर सकता है | हमारी रामायण, भगवत गीता हो,साकेत 

हो,या यशोधरा या फिर कोई बरट्रेंड रसल,जॉन रस्किन का साहित्य | शानदार दोहों 

के लिए हार्दिक बधाई |

Comment by seema agrawal on September 12, 2012 at 10:28am

अलंकार  रस  छंद  के , बिना  कहाँ रस-धार
बिन  प्रवाह  कविता  नहीं गीत  बिना  गुंजार |
अक्षर - अक्षर चुन सदा, शब्द गठरिया बाँध

राह दिखाये व्याकरण , भाव लकुठिया काँध |..........क्या कहने अरुण जी काव्य में रूचि रखने वालों को बहुत सहज तरीके से काव्य ......................................................की मूलभूत ज़रूरतों से आगाह करा दिया आपने ....यही तो दोहों  की विशेषता है

सीधी बात नो बकवास 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 9:56am

अति सुन्दर सब दोहरे, मुखरित है साहित्य.

मित्र बधाई आपको,  चमकें बन आदित्य..   सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 11, 2012 at 8:46pm

सभी उत्कृष्ट दोहे अरुण जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ashok Kumar Raktale on September 11, 2012 at 8:28pm

आदरणीय निगम साहब,

                      सादर, बहुत सुन्दर दोहावली. हार्दिक बधाई स्वीकारें.

खान पान संगीत धुन, साहित्य कइ प्रकार,

गीत गजल छंद रस है, पर इनका आधार/

Comment by Rekha Joshi on September 11, 2012 at 6:31pm

दीपक पलभर जल बुझे, नित्य जले आदित्य
सकल जगत जगमग करे,कालजयी साहित्य |,एक से बढ़ कर एक दोहे रचे है आपने  ,हार्दिक बधाई 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on September 11, 2012 at 6:02pm

सुन्दर, भावपूर्ण एवं सरस दोहों पर हार्दिक बधाईस्वीकार करें आदरणीय! साभार,


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 11, 2012 at 4:27pm

//दीपक पलभर जल बुझे, नित्य जले आदित्य
सकल जगत जगमग करे,कालजयी साहित्य |//

वाह भाई अरुण जी , सभी दोहें एक पर एक हैं, बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति, बधाई स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
37 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
1 hour ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 शीर्षक — वापसी आज कोर्ट में सूरज और किरण के तलाक संबंधी केस का…"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"भड़ास'मुझे हिंदी सिखा देंगे?फेसबुक की महिला मित्र ने विकल जी से गुजारिश की।'क्यों…"
5 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"वतन में जतन (लघुकथा) : अमेरिका वाले ख़ास रिश्तेदार अपने युवा बच्चों को स्वदेश घुमाने और…"
8 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service