For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
Share on Facebook MySpace

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Friends

  • Samar kabeer

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Groups

 

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Page

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |"
Dec 1, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)
"लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |"
Dec 1, 2022
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Dec 1, 2022
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Dec 1, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"Zaif saheb बहुत बहुत शुक्रिया |"
Nov 30, 2022
Zaif commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"बहुत ख़ूब ग़ज़ल, सर जी। सादर।"
Nov 30, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)
"आदरणीय , समर कबीर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |"
Nov 27, 2022
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'यही है अच्छा कि भूलकर सब हयात में नौ क़दम बढ़ाएँ' --- इस मिसरे में 'नौ क़दम' की तरकीब पर ग़ौर करें I  ''तुरंत' अब तक की नज़्म…"
Nov 27, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"राखी जैन जी , आपकी आनंदित करने वाली सराहना से मन तृप्त हुआ | सृजन सार्थक हुआ | सादर आभार।"
Nov 24, 2022
Rakhee jain commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय"
Nov 24, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)

एक परम्परागत ग़ज़ल ( 121 22 *4 )अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँकि आरज़ू है अक़ीदतों का वो सबसे पहले दिया जलाएँ**अगर अभी तक है याद बाक़ी तो इल्तज़ा है करें इनायतहिना लगाकर वो दस्त-ओ-पा पर हमारा रोज़-ए-फ़ना मनाएँ**हमारी ख़ातिर दुआ न मांगें कि जन्नतें हों हमें भी हासिलवतन में अम्न-ओ-सुकूँ की ख़ातिर वो अपने दस्त-ए-दुआ उठाएँ**फ़ना हुए हम रक़ीब से अब अदु-गरी और दोस्ती क्याउन्हें दिया हक़ रक़ीब से वो ख़ुशी से अब सिलसिले बढ़ाएँ**निचोड़ कर दिल का ख़ून हमदम लिखे थे सारे ख़तूत हमनेज़रा सी कीजे सनम इनायत न ख़त…See More
Nov 24, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"आदरणीय समर कबीर साहेब , ग़ज़ल पर आपकी नज़रसानी और आपकी हौसला बढ़ाती राय के लिए बहुत बहुत आभार | अवश्य इन पर ग़ौर करूँगा |"
Nov 24, 2022
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'छा गई हुस्न की अदा हम पर मौज़िजा लाजवाब कर डाला' इस शे'र में 'मौजिज़:' शब्द उचित नहीं,इस पर विचार करें । 'दिल मगर इज़्तिराब कर डाला' इस…"
Nov 24, 2022
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)

ग़ज़ल(2122 1212 22 /112 )आपका इन्तिख़ाब कर डालाहमने कार-ए-सवाब कर डाला**बर्क़-ए-हुस्न-ओ-शबाब चमकी जबआपको बे-हिज़ाब कर डाला**पी मय-ए-चश्म ख़ूब जी भर केख़ुद को मस्त-ए-शराब कर डाला**छा गई हुस्न की अदा हम परमौज़िजा लाजवाब कर डाला**लुत्फ़-ए-उल्फ़त मिला है खूब सनमदिल मगर इज़्तिराब कर डाला**आपका अक़्स बन गए, ख़ुद कोइश्क़ में कामयाब कर डाला**क़ुर्बतें दे कभी फ़िराक़ कभीक्या करम बे-हिसाब कर डाला**ठहरे ठहरे से मेरे जीवन मेंक्या गज़ब इंक़लाब कर डाला**आपको पा के हर अधूरा 'तुरंत 'हमने कामिल है ख़्वाब कर डाला**गिरधारी सिंह…See More
Nov 19, 2022
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
"एक और बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय..."
Jul 4, 2021
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"वाह क्या ग़ज़ल कही है आदरणीय गहलोत जी...वाकई बहुत ही प्यारी...हार्दिक बधाई"
Jul 4, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)

एक परम्परागत ग़ज़ल ( 121 22 *4 )
अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ
कि आरज़ू है अक़ीदतों का वो सबसे पहले दिया जलाएँ
**
अगर अभी तक है याद बाक़ी तो इल्तज़ा है करें इनायत
हिना लगाकर वो दस्त-ओ-पा पर हमारा रोज़-ए-फ़ना मनाएँ
**
हमारी ख़ातिर दुआ न मांगें कि जन्नतें हों हमें भी हासिल
वतन में अम्न-ओ-सुकूँ की…
Continue

Posted on November 24, 2022 at 6:30pm — 4 Comments

आपका इन्तिख़ाब कर डाला(136)

ग़ज़ल(2122 1212 22 /112 )
आपका इन्तिख़ाब कर डाला
हमने कार-ए-सवाब कर डाला
**
बर्क़-ए-हुस्न-ओ-शबाब चमकी जब
आपको बे-हिज़ाब कर डाला
**
पी मय-ए-चश्म ख़ूब जी भर के
ख़ुद को मस्त-ए-शराब कर डाला
**
छा गई हुस्न की अदा हम पर
मौज़िजा लाजवाब कर डाला…
Continue

Posted on November 19, 2022 at 7:00pm — 8 Comments

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )
जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं
न है बर्ग-ए-गुल न शमीम-ए-गुल मेरी ज़ीस्त में बचे ख़ार हैं
**
तेरे हिज्र से जो मिले हैं ग़म वही दौलतें हैं मेरी सनम
मेरी फ़िक्र का है सबब तो बस ये बढे हुए ग़म-ए-यार हैं
**
मेरे वास्ते है तू नाज़नीं बड़ी दिलनशीं लगे महज़बीं
अरे…
Continue

Posted on June 22, 2021 at 11:30pm — 3 Comments

मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )

ग़ज़ल ( 1222 1222 1222 1222 )
मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे
सफ़र भी तुम मुसाफ़िर तुम मक़ाम-ए-दिल तुम्हीं तो थे
**
अकेलेपन के साथी हो अभी तक याद में ढलकर
मुसीबत में ख़ुशी में बारहा शामिल तुम्हीं तो थे
**
हथेली की लकीरों को नुज़ूमी को दिखाते क्या
तुम्हीं कल थे हमारा और मुस्तक़्बिल तुम्हीं तो…
Continue

Posted on June 17, 2021 at 8:30pm — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई। भाई समर जी के सुझाव से यह…"
3 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?
"आदरणीय समर कबीर साहेब , हार्दिक आभार आपका।"
7 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"दूसरी बात 'दो' शब्द की जगह "दे" शब्द उचित होगा ,देखिएगा I  दरअसल…"
9 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"आदरणीय समर कबीर जी आपकी सूक्ष्म विवेचना से ग़ज़ल में निखार ही आएगा...जरूरी सुधार बिल्कुल किये जा सकते…"
9 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जी, बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी"
10 hours ago
Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  'पाँव कब्र में जो…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चन्दा मामा! हम बच्चों से (बालगीत) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ . भाई समर जी सादर अभिवादन। गीत पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
21 hours ago
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें…"
21 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी प्र्स्तुति पर बधाई स्वीकार करें I "
22 hours ago
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I "
22 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चन्दा मामा! हम बच्चों से (बालगीत) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, अच्छा बाल गीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
22 hours ago
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियाँ देख लें ।"
22 hours ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service