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Anjuman Mansury 'Arzoo'
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Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-82 (विषय: 'सैन्य जीवन)
"लघुकथा-सर्दी वर्दी स्वाति एक शिक्षक पिता की बेटी थी अतः आर्थिक स्थिति बहुत खराब न थी । जाड़ों के दिन थे, बाज़ारों में रंग बिरंगी स्वेटर और ऊन का आना शुरु हो गया था । स्वाति उन रंगों से आकर्षित हुई, और ललचा कर माँ से फ़रमाइश करके बोली- "माँ मुझे…"
Jan 31
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"एडिट करने में मुझे परेशानी हो रही है इसलिए यहां कमेंट में....... उस्ताद मोहतरम समर कबीर साहब की ख़ूबसूरत इस्लाह के बाद....... वज़्न - 2122 2122 2122 212 ये ग़ज़ल गोई है क्या बस मेहरबानी आपकी नज़्म जिसमें करके गाएँ हम कहानी आपकी /1 इश्क़ के हर रंग…"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब उस्ताद मुहतरम, हम नाव में नहीं पैदल सफ़र कर रहे हैं,  जिनके सर पर आप दोनों दरख़्तों की दुआओं का साया है"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ज़र्रा नवाज़ी कें लिए तहे दिल से शुक्रिया, नवाज़िशें मुहतरमजी आदरणीय ! अब उस्ताद मुहतरम समर कबीर जी की इस्लाह के मुताबिक सुधार करती हूं"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरमा "
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया मुहतरम"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"ख़ुशकिस्मती से आप दोनों ही मेरे उस्ताद हैं, काबिल ए एहतराम हैं आदरणीय"
Dec 29, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"उस्ताद मोहतरम समर कबीर जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने, खूबसूरत इस्लाह और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया, मैं सुधार करती हूं"
Dec 28, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"मोहतरम शिज्जु "शकूर" जी आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
Dec 28, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"उस्ताद मुहतरम रवि शुक्ल जी आदाब, बहुत प्यारी मुरस्सा ग़ज़ल की तहे दिल से मुबारकबाद हाज़िर है"
Dec 28, 2021
Anjuman Mansury 'Arzoo' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय ऋचा यादव जी नमस्कार, हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
Dec 28, 2021

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Chhindwara
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ग़ज़ल - 'आरज़ू' टूटी न उम्मीद से रिश्ता टूटा

वज़्न -2122 1122 1122 22/112

क्यों इसे आब दिया सोच के दरिया टूटा

जब समुंदर के किनारे कोई तिश्ना टूटा

एक साबित क़दम इंसान यूँ तन्हा टूटा

देख कर उसको न टूटे कोई ऐसा टूटा

वस्ल की जिस पे मुकद्दर ने लिखी थी तहरीर

वक़्त की शाख़ से वो क़ीमती लम्हा टूटा

तेरे बिन ज़ीस्त मेरी तुझ-सी ही मुश्किल गुज़री

हिज्र में मुझ पे भी तो ग़म का हिमाला टूटा

कुछ न टूटा मेरे हालात की आँधी में बस

जिसमें तुम थे वही ख़्वाबों…

Continue

Posted on November 3, 2021 at 11:22am — 4 Comments

ग़ज़ल- मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं

वज़्न -1212 1122 1212 22/112

मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं

गिरा के झोपड़ी वो बस्तियाँ बनाते हैं

ये आ'ला ज़र्फ़ हैं कैसे, बुलंदी पाते ही

उन्हें गिराते हैं जो सीढ़ियाँ बनाते हैं

है भूख इतनी बड़ी अब कि छोटे बच्चे भी

किताब छोड़ चुके बीड़ियाँ बनाते हैं

ग़िज़ा जहान में उनको नहीं मयस्सर क्यों

जो फ़स्ल उगा के यहाँ रोटियाँ बनाते हैं

उन्हें नसीब ने घर जाने क्यों दिया ही नहीं

सभी के वास्ते जो आशियाँ बनाते…

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Posted on October 23, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया

वज़्न -2122 2122 2122 212

ख़ुद को उनकी बेरुख़ी से बे- ख़बर रहने दिया

उम्र भर दिल में उन्हीं का मुस्तक़र* रहने दिया (ठिकाना)

उनकी नज़रों में ज़बर होने की ख़्वाहिश दिल में ले

हमने ख़ुद को ज़ेर उनको पेशतर रहने दिया

उम्र का तन्हा सफ़र हमने किया यूँ शादमाँ

उनकी यादों को ही अपना हमसफ़र रहने दिया

उनसे मिलकर जो कभी होती थी इस दिल को नसीब

अपने ख़्वाबों को उसी राहत का घर रहने दिया

वो न आएँगे शब- ए- फ़ुर्क़त…

Continue

Posted on October 19, 2021 at 12:07pm — 4 Comments

ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया

वज़्न - 22 22 22 22 22 2

उनसे मिलने का हर मंज़र दफ़्न किया

सीप सी आँखों में इक गौहर दफ़्न किया

दिल ने हर पल याद किया है उनको ही

जिनको अक़्ल ने दिल में अक्सर दफ़्न किया

ख़्वाब उनकी क़ुर्बत के टूटे तो हमने

इक तुरबत को घर कहकर घर दफ़्न किया

उनका शाद ख़याल आने पर भी हमने

कब अपने अंदर का मुज़तर दफ़्न किया

मुझमें ज़िंदा हैं मेरे अजदाद सभी

मौत फ़क़त तूने तो पैकर दफ़्न…

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Posted on October 16, 2021 at 8:30pm — 23 Comments

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At 11:56am on September 30, 2021, Sheikh Shahzad Usmani said…

आदाब।.बहुत-मुबारकबाद और हार्दिक स्वागत आदरणीया अंजुमन 'आरज़ू' साहिबा। अब आपकी रचनायें अधिक सुविधा से पढ़ सकेंगे। गोष्ठियों में आपका इंतज़ार और स्वागत।

At 10:53pm on September 29, 2021, Anjuman Mansury 'Arzoo' said…
जी बहुत-बहुत शुक्रिया मोहतरम, आदाब
At 10:53pm on September 29, 2021, अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी said…

मुहतरमा अंजुमन साहिबा ओ बी ओ के मंच पर आप का स्वागत है। सादर। 

 
 
 

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