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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही प्रेरक रचना है मन खुश हो गया बधाई कुबूल कीजिए"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post ताना-बाना
"आदरणीया अन्विता जी यह कविता हमें बता रही आपके भीतर   कारयित्री भावयित्री प्रतिभा भरी हुई है उस प्रतिभा को हृदयतल से बधाई"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post बेहतर तो
"हम भी क्या दीवाने निकले,वाह वाह बहुत ही धारदार रचना आदरणीया अन्विता जी दिल से बधाई आपको"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आदरणीय मनन कुमार जी बहुत ही शानदार गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आदरणीय अमन सिन्हा जी बहुत वेमिशाल रचना है बार बार पढ़ने को जी कर रहा ऐसे लग रहा जैसे मुँह की बात किसी ने छीन ली,बहुत बहुत बधाई"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( अंधी गली के मोड़ पर.....)
"सारे वदन पर बोझ है मिट्टी लदान हैं, हकीकत को बयां करती बहुत ही दमदार गजल आदरणीय गणवीर साहब बहुत बहुत बधाई"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - इस तरफ इंसान कड़की में
"गुम हुई मुस्कान कड़की में,आदरणीय राम अवध जी यथार्थ को जमी पर लाकर रख दिया आपने ,सच्चाई को बयां करती इस शानदार गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहब कमाल की गजल प्रस्तुत की आपने,न बन पाया तेरे जैसा कभी मैं ,बहुत सुंदर मन मगन हो गया बधाई कुबूल कीजिए"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post उस बेवफ़ा से (ग़ज़ल)
"यूँ जिंदगी से आँख चुराना बहुत हुआ,कमाल की गज़ल आदरणीय रवि भसीन साहब मंत्रमुग्ध हो गया पढ़कर ,दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन इस ग़ज़ल की कितनी भी प्रशंसा की जाय कम है, यह समसामयिक गजल सबकुछ बयां कर डाली इसके लिए सादर बधाई कुबूल कीजिए"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on AMAN SINHA's blog post दोस्ती
"आदरणीय अमन सिन्हा जी आंशिक तंकण त्रुटियाँ छोड़ दिया जाय तो भाव मार्मिक हैं बधाई हो"
May 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी यथार्थ के धरातल पर बहुत ही अच्छी गज़ल लगी ,बहुत बहुत बधाई"
May 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मजदूर को समर्पित एक रचना
"भाई सुरेंद्र जी आप प्रतिभा के धनी हैं, हर विधा के मर्मज्ञ हैं, आपकी यह रचना यथार्थ को आईना दिखा रही ,बहुत बहुत बधाई"
May 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on amita tiwari's blog post शहर शर्म के चलते
"आदरणीया अमिता तिवारी जी इस मार्मिक कविता की हम कितनी भी प्रशंसा करें कम है, मुझे रियली बहुत अच्छी कविता लगी,हार्दिक शुभकामनाएं"
May 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रामबली गुप्ता's blog post दिन को चैन और रातों को नींद नहीं है इक पल-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी आपकी प्रतिभा से मैं भलीभाँति अवगत हूँ, आपकी यह रचना बहुत ही धारदार है मार्मिक है, दिल से बधाई कुबूल कीजिये"
May 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post श्रमजीवी
"भाई सुरेंद्र जी आपके उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से आभार"
May 3

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Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

जीवन की संध्या

जहाँ बुजुर्गों की सेवा हो, जीवन सुखमय होता है।
जो ठोकर देता बूढ़ों को, भार दुखों का ढोता है।।
अभिवादन नित करने वाले,सौम्य शील गुण पाते हैं।
वृद्ध अनादर करने वाले, खुद पीछे रह जाते हैं।।
रोदन करता जहाँ बुढ़ापा, घर आँगन भी रोते हैं।
इज्जत तार-तार होती जब, बूढ़े भूखे सोते हैं।।
कोमल किसलय को आँचल में, ढँककर दूध पिलाई थी।
अस्थिशेष असहाय निबल तन, झुकी कमर माँ ताई थी।।
पिचके गाल कराल हाल में, खाँस रहे बूढ़े…
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Posted on October 1, 2019 at 1:00pm — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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