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जिस दम सूरज ढल जाएगा - SALIM RAZA REWA

22 22 22 22 -
जिस दम सूरज ढल जाएगा
रात  का  जादू  चल जाएगा
-
सँभल के चलना सीख लें वर्ना
कोई  तुझको  छल  जाएगा
-
दुनिया  का  दस्तूर  यही है
आज जो है वो कल जाएगा
-
बचपन  के दिन याद आएँगे
जिस्म जवां जब ढल जाएगा
-
ग़म  से  यारी करना सीखो
वक़्त बुरा  भी  टल जाएगा
-
अँगारे  मत   बोना   घर  में
घर आँगन सब जल जाएगा
-
 मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on October 3, 2017 at 7:12pm
आदरणीय अरुन शर्मा 'अनन्त जी,
ग़ज़ल में आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया
Comment by SALIM RAZA REWA on October 3, 2017 at 7:10pm
जनाब राम शिरोमणि जी,
पुरानी ग़ज़ल में आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया,
Comment by SALIM RAZA REWA on September 6, 2017 at 7:54am

आदरणीय सौरभ जी,
आपकी मुहब्बत और बधाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,आप सभी चाहने वालों के लिए एक शेर नज़्र हैं ,

जो औरों  के  खुशिओं  में खुश होते हैं !!
उनका भी घर खुशिओं से भर दे मौला !!

Comment by SALIM RAZA REWA on September 6, 2017 at 7:48am

आदरणीय गणेश जी,

आपकी मुहब्बत और दाद की लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,आप यूँ ही अपनी नज़रे इनायत बनाए रखें ,


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 4, 2013 at 9:04pm

सभी अशआर अच्छे हैं, अंतिम शेर बहुत ही बढ़िया लगा, कुल मिलाकर प्रस्तुत ग़ज़ल दाद के काबिल है, दाद कुबूल करें आदरणीय सलीम साहब |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2013 at 7:54pm

भाई सलीमरज़ा साहब, एक अच्छी ग़ज़ल के लिए शुक्रिया. बहुत खूब !

इस शेर पर विशेष बधाई कह रहा हूँ -

अँगारे मत बोना घर में !
घर आँगन सब जल जाएगा !!

शुक्रिया..

Comment by अरुन 'अनन्त' on February 4, 2013 at 11:31am

वाह भाई सलीम रजा साहब बेहद लाजवाब ग़ज़ल कही है, दिली दाद कुबूलें. सादर

Comment by विजय मिश्र on February 4, 2013 at 11:17am

बहुत सुगम और सरल प्रवाह लिए सीधी सी मगर काम की बात और प्यारी सी नसीहत . मुबारक हो सलीम भाई .

Comment by ram shiromani pathak on February 4, 2013 at 11:15am
सम्हल के चलना सीखो वर्ना!

तू दुनिया में छल जाएगा !!

ग़म  से  यारी करना सीखो !

वक़्त बुरा सब टल जाएगा !!

सुन्दर रचना सर जी बधाई स्वीकारें............ 

 

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