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कहें किससे व्यथा ?

तुम हुए जो व्यस्त
अभिभावक कहें किससे व्यथा?
हो गए कितने अकेले 
क्या तुम्हे यह भी पता?

जिन्दगी की राह में
तुम तो निकल आगे गए
वे गहन अवसाद, द्वन्दों
में उलझ कर रह गए

सहन कर पाए न वे 
संतान की ये बेरुखी
बेसहारा , ढलती वय
थक कर, हताशा में फंसी

तुम उन्हे कुछ वक्त दो
प्यार दो , संतृप्ति दो
जिन्दगी जीने को कुछ
आधार कण रससिक्त दो

पुष्प फिर आशीष के
तुम पर बरस ही जाएंगे
कवच बन संसार के
संताप से टकराएंगे


मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 707

Comment

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Comment by Usha Awasthi on August 28, 2019 at 1:47pm

प्रणाम, हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Usha Awasthi on August 27, 2019 at 11:11pm

हार्दिक धन्यवाद आपका।

Comment by pratibha pande on August 27, 2019 at 6:53pm

वाह  बहुत सुन्दर भाव। हार्दिक बधाई आदरणीया ऊषा अवस्थी जी

Comment by Usha Awasthi on August 27, 2019 at 1:31pm

आदाब,धन्यवाद आपका।

Comment by Samar kabeer on August 25, 2019 at 3:35pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

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