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जाने हम किसके  मोहताज़ हैं,

जज्बात वो कल ना रहेंगे, जो आज हैं।
इतने मशरूफ़ भी ना रहो मेरे हमदम,
इस उम्र के बड़े लंबे परवाज़ है।

नजर भर कर देखो, हसरतों की बात है,
एक पल का नहीं, उम्र भर का साथ है।
बेरुखी जहर बन जाएगी आहिस्ता-आहिस्ता,
सुनो सरगोशी से ये बात, राज की बात है।

सम्हलने के लिए इबरत ही काफी है,
अंजाम पर तो माफी तलाफ़ी है।
मर जाती है जब सारी ख्वाहिशें तो,
फिर अहसास की सांस भी ना काफी है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on February 20, 2019 at 10:39pm

अच्छी रचना हुई,बधाई ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 18, 2019 at 9:51pm
बढ़िया रचना आदरणीया राहिला जी| हार्दिक बधाई |
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 18, 2019 at 9:26pm
बढ़िया रचना आदरणीया राहिला जी| हार्दिक बधाई |
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 18, 2019 at 8:32pm

आदाब। बहुत बढ़िया उम्दा लेखनी/रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया राहिला आसिफ़ साहिबा।

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