For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मिर्ज़ा ग़ालिब की ज़मीन में एक कोशिश ।

'भर के आँखों में नमी लहज-ए-साइल बाँधा ।

उनसे मिलने जो चला साथ ग़म ए दिल बाँधा ।

उनकी तशबीह सितारों से न अशआर में दी ।

उनके रुख़सार पै जो तिल था उसे तिल बाँधा ।

मैं भँवर से तो निकल आया मगर मैरे लिए ।

एक तूफ़ान भी उसने लबे साहिल बाँधा ।

हौसले पस्त हुए पल में मिरे क़ातिल के ।

तीर के सामने जब सीन-ए- बिस्मिल बाँधा ।

लुत्फ़ अंदोज़ है "जावेद"तग़ज़्ज़ल कितना ।

हमने मोज़ू ए महब्बत को सलासिल बाँधा ।

मौलिक/अौर प्रकाशित  मिर्ज़ा जावेद बेग ।

Views: 469

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by mirza javed baig on September 21, 2018 at 10:17pm

आली जनाब सौरभ पांडे जी आदाब 

मेरी ग़ज़ल को अपनी मुस्तनद दाद ओ तेहसीन से नवाज़ने 

के लिए दिल की अमीक़ गहराइयों से शुक्र गुज़ार हूं ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 21, 2018 at 3:04pm

आदरणीय मिर्ज़ा जावेद बेग़ जी, आपकी इस अच्छी ग़ज़ल पर दाद दे रहा हूँ.

शुभकामनाएँ व बधाइयाँ 

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 5:05pm

जनाब नरेंन्द्र सिंह चौहान जी आदाब 

ग़ज़ल को पसंद फ़रमा कर दादो तहसीन से नवाज़ने के लिए 

दिली शुक्रिया ।।

Comment by Samar kabeer on August 31, 2018 at 2:55pm

जनाब नरेन्द्र सिंह चौहान साहिब आदाब, आपसे पहले भी कई बार निवेदन कर चुका हूँ कि इस तरह की टिप्पणी ओबीओ मंच की परिपाटी नहीं है,ये सोशल मीडिया पर ही चलती होगी,ये सीखने सिखाने का पटल है, यहाँ पहले रचनाकार को पूरे सम्मान से संबोधित किया जाता है,फिर उसकी रचना की तारीफ़ या आलोचना शिष्टता के साथ की जाती है,उदाहरण स्वरूप इसी ग़ज़ल पर आई हुई टिप्पणियां देखें ,उम्मीद है मेरी बात को संज्ञान में लेंगे ।

Comment by Samar kabeer on August 31, 2018 at 2:45pm

//

महब्बत का रहे बस हाथ सर पे

मुझे इस पेड़ का साया बहुत है//

अच्छा शैर हुआ ।

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 12:10pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब की ख़िदमत में

सलाम अर्ज़ करता हूं ।

आप जिस तरह से नौमश्क शौरा की हौसला अफ़ज़ाई करते हें 

यक़ीनन बे मिसाल है ।

आपकी बेलौस महब्बतों का हमैशा से ही क़ाइल हूं अपना एक शैर 

आपकी नज़्र करता हूं ।

महब्बत का रहे बस हाथ सर पे :-) 

मुझे इस पेड़ का साया बहुत है ।

Comment by narendrasinh chauhan on August 31, 2018 at 12:01pm
खुब सुन्दर रचना....हार्दिक बधाई.
Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 12:01pm

जनाब अजय तिवारी जी आदाब 

तालिब इल्म की हौसला अफ़ज़ाई की आपने 

बेहद शुक्रगुज़ार हूं ।

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 11:58am

जनाब आरिफ़ भाई साहिब सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से ममनून व मशकूर हूं ।

Comment by Mohammed Arif on August 31, 2018 at 9:04am

आदरणीय जावेद जी आदाब,

                     लाजवाब ग़ज़ल । हर शे'र पर दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"ख्याल बहुत उम्दा हैं गज़ल में। हार्दिक बधाई, भाई लक्ष्मण जी।"
2 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आपकी यह गज़ल पढ़ कर भी आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, मेरे भाई, लक्ष्मण जी।"
2 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सामयिक स्थिति इंगित करती यह गज़ल अच्छी बनी है, भाई लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ…"
16 hours ago
Admin posted discussions
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता)…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनजाना उन्माद
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
22 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद मिलते ही तुमसे हर बारनीलाकाश सारामुझको अपना-सा लगेबढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वारकण-कण…See More
23 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी…See More
yesterday
सालिक गणवीर posted blog posts
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service