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बातें  ... 

लम्हों की आग़ोश में
नशीली सी रातों की
शीरीं से अल्फ़ाज़ की
महकती बातें

बे हिज़ाब रातों की
शोख़ी भरी शरारतों की
तन्हाई में भीगी
बरसाती बातें

आँखों के सागर में
जज़्बात की कश्ती में
यादों के साहिल पे
सुलगती बातें

जिस्म की पनाहों में
अनदेखी राहों में
दिल की गुफ़ाओं में
बहकती बातें

मोहब्बत के मौसम में
आँखों की शबनम में
ग़ज़ल की करवटों में
उफ़नती बातें

आर्ज़ू के लिबास में
तिश्ना लबों की प्यास में
लम्स से बतियाती
वो मदमाती बातें

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Mohammed Arif on June 21, 2018 at 7:49pm

बनती बातें

बिगड़ती बातें

नदी के मानिंद उफनती बातें

अहसासों में ढलती

साँसों में पिघलती 

अल्फ़ाज़ों में बदलती

छन-छन छन-छन करती

पहली बारिश की बूँदों सी मचलती

                  हार्दिक बधाई शानदार पेशकश पर आदरणीय सुशील सरना जी ।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 21, 2018 at 3:57pm

आदरणीय सुशील सरना जी, नमस्कार ।  अच्छी कविता की प्रस्तुति के लिए बधाई। 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 21, 2018 at 3:53pm

बेहतरीन, वाह बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by TEJ VEER SINGH on June 21, 2018 at 3:52pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बेहतरीन कविता

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