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जताएं मातृ दिन पर हम

विधाता छंद 

जताएं मातृ दिन पर हम.....

जगत में मात के जैसा,नहीं दूजा दिखा भाई !

कहो माता कहो मम्मी, कहो चाहे उसे माई  !

पुकारे बाल माँ जब भी, तुरत वह दौडकर आई !

बुरा माना नहीं उसने, कभी मन बाल रुसवाई  !१!

सहे आतप सहे वर्षा, सहे वह शीत दुखदाई  !

लला को पालती ऐसे, उसे कुछ आँच ना आई !

जताएं मातृ दिन पर हम, सभी आभार दाता का !

दिया उपहार में जिसने, हमें है प्यार माता का  !२!

- मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by vijay nikore on May 15, 2018 at 12:37pm

अच्छी रचना के लिए बधाई।

Comment by Mohammed Arif on May 15, 2018 at 11:03am

आदरणीय सत्यनारायण जी आदाब,

                      मातृ दिवस पर माता को समर्पित बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Satyanarayan Singh on May 14, 2018 at 12:22am

आदरणीय समर कबीर जी सादर 

   उत्साहवर्धन के लिय आपका हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. 

Comment by Samar kabeer on May 13, 2018 at 9:51pm

जनाब सत्यनारायण सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।

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