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राजनीति की औकात (लघुकथा)

लव कुश के मुख से रामायण का गान सुनकर लोग अचंभित थे। लोगों में बातचीत हो रही थी," अयोध्या का और श्री राम चरित का वर्णन बहुत सुन्दर किया है।"
श्री राम दरबार में सीता जी के वनवास जाने के दृष्टान्त में लोगों की आँखों से झर झर आँसू बहने लगे।
इस वृत्तांत को सुनाते हुए लव और कुश के चेहरे पर क्रोध झलक रहा था।
किसीने पूछा,"बेटा तुम क्रोधित क्यों हुए?"
लव ने प्रतिप्रश्न किया ," ये कैसा न्याय कि किसी व्यक्ति के शक करने पर राजा ने रानी को देश से निष्कासित कर दिया.....!"
सब के झुके चेहरों को देखकर श्री राम मौन ही रहे।
तब कहीं से वह धोबी आया, जिसकी वजह से ही सीता को ऐसी सज़ा मिली थी, उसने पूछा," यह पूछने वाले तुम कौन होते हो? "
"साहित्य का विद्यार्थी .... " लव ने धोबी को उत्तर दिया।
राज दरबार अब चुप था।
मौलिक एवं अप्रकाशित।

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Comment by Nita Kasar on April 8, 2018 at 3:15pm

क़लम की ताक़त ने तख्तोंताज के ताबूत में कील ठोककर सत्ता परिवर्तन करवा दिया  है ।इतिहास गवाह है जनता ने क़लम का भरोसा किया है बधाई आद० कल्पना भट्ट जी ।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 5, 2018 at 4:30pm

एक साहित्यकार ही आईना दिखाने के हिम्मत रखता है | अच्छी लघुकथा के लिए बधाई आदरणीया  

Comment by vijay nikore on April 4, 2018 at 9:33am

आप लघु कथा अच्छी लिखती हैं। आपको हार्दिक बधाई।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 3, 2018 at 5:03pm

धन्यवाद आदरणीया नीलम जी |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 3, 2018 at 5:02pm

नमस्ते आदरणीय समर भाई जी, आपको यह प्रयास उम्दा लगा पढ़कर ख़ुशी हुई, प्रयास सफल रहा | :) सादर| 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 3, 2018 at 4:59pm

धन्यवाद आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब | आपको कथा पसंद आई और सर्वश्रेस्थ लगी जानकर ख़ुशी हुई और मनोबल भी बढ़ा साथ ही दायित्व भी -/\- | सादर |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 3, 2018 at 4:56pm

धन्यवाद आदरणीय अजय तिवारी जी| 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 3, 2018 at 4:55pm

सादर धन्यवाद आदरणीय शहजाद उस्मानी जी |

Comment by Neelam Upadhyaya on April 3, 2018 at 4:19pm

आदरणीय कल्पना भट्ट जी, नमस्कार । बहुत ही बढ़िया लघुकथा हुई है । प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on April 2, 2018 at 12:36pm

बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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