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सांस भर की ज़िंदगी ...

सांस भर की ज़िंदगी ...

वक़्त के साथ
हर शै अपना रूप
बदलती है
धूप ढलती है तो
छाया भी बदलती है

वक़्त के साथ
मोहब्बत की चांदी
केश वन में
चमकने लगी

उम्र की पगडंडियां
झुर्रियों में झलकने लगीं

वक़्त के साथ
यौवन का दम्भ
लाठी का मोहताज़ हो गया
दर्पण
आँख से नाराज़ हो गया
अनुराग
दर्द का राग हो गया
हदें
निगाहों से रूठ गयी
नफ़स
छटपटाई बहुत
आखिर
थककर टूट गयी
वक़्त
चलता रहा
बस
सांस भर की ज़िंदगी
दूर कहीं

छूट गयी


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on January 2, 2018 at 6:47pm

आदरणीय अजय तिवारी जी प्रस्तुति को अपना आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2018 at 6:47pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

Comment by Ajay Tiwari on January 1, 2018 at 11:45pm

आदरणीय सुशील जी, इस प्रभावशाली काव्य-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई. 

नव वर्ष मंगलमय हो !

सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2018 at 8:42pm

आ. भाई सुशील जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on January 1, 2018 at 6:59pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी सादर प्रणाम ... सृजन को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। साथ ही आपको नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनयें।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 31, 2017 at 6:41pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बेहतरीन प्रस्तुति।

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2017 at 6:14pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब , आदाब . प्रस्तुति की आत्मीय सराहना का दिल से आभारी।

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2017 at 6:14pm

आदरनीय महेन्द्र कुमार जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2017 at 6:13pm

आदरणीय सुरेन्दर नाथ सिंह जी सृजन की मन मुदित करती प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2017 at 6:13pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब . सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार

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