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शादी की महफिल में,
हाइलोजन के भार से,
दबा कंधा,
ताशे और ढोल का,
वजन उठाये हर बंदा,
हाइड्रोजन भरे गुब्बारे,
सजाने वालों का पसीना,
स्टेज बनाने गड्ढे खोदने का,
तनाव लिये युवक,
चूड़ीदार परदों पर,
कील ठोंकता शख्श,
पूड़ी बेलती कामगर,
महिलाओं की एकाग्रता,
कुर्सियाॅं सजाते,
युवकों का समर्पण,
कैमरा फलैश में,
चमकते लोगों की शान,
कहीं न कहीं,
इन सबका होना जरूरी है,
किसी की खुशी,
किसी की मजबूरी है,
ये सभी मिलकर,
बनाते वादी हैं,
इन सबकी खुशियों से ही,
धूम से होती शादी है।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Manoj kumar shrivastava on November 21, 2017 at 7:18pm
आदरणीय शुक्ला जी आपका सादर आभार।
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on November 21, 2017 at 6:23pm
बहुत सुंदर
भ्रमर ५
Comment by Manoj kumar shrivastava on November 20, 2017 at 9:53pm

जी बिल्कुल , आपकी बातों से मैं पूरी तरह सहमत हूं आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार।

Comment by Mohammed Arif on November 20, 2017 at 8:19am
आदरणीय मनोज कुमार जी आदाब,
समाज में सभी का अपना-अपना महत्व है । कोई शख़्स अकेला रहकर अपना कार्य संपन्न नहीं कर सकता । हार्दिक बधाई इस रचना पर ।
Comment by Manoj kumar shrivastava on November 19, 2017 at 9:54pm

सम्माननीय सुरेन्द्रनाथ सिंह जी, आपका हृदय से आभार। आपसे सतत मार्गदर्शन की अपेक्षा है।

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 19, 2017 at 9:51pm

आदरणीय समर कबीर जी आपका हृदय से आभार। आपके मार्गद मार्गदर्शन का सतत अभिलाषी हूं। धन्यवाद!

Comment by Samar kabeer on November 19, 2017 at 5:28pm
जनाब मनोज कुमार जी आदाब,अच्छे भाव समेटे कविता में,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by नाथ सोनांचली on November 19, 2017 at 2:33pm
आद0 मनोज कुमार श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन, अच्छा प्रयास है आपका। भावों को सही ढंग से उकेरा है आपने, बधाई आपको।

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