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मापनी २२ २२ २२ २२

 

झील सी गहरी नीली आँखें

हैं कितनी सकुचीली आँखें

 

खो देता हूँ  सारी सुध बुध

उसकी देख नशीली आँखें

 

यादों  के सावन  में भीगीं

हो गईं कितनी गीली आँखें

 

मोम बना दें पत्थर को भी

छोटी  सीली  सीली आँखें

 

राह तुम्हारी  तकते तकते

हो गईं  हैं पथरीली  आँखें

 

बढती बेलें देख के’ अपनी

होतीं  हैं    गर्वीली  आँखें

प्रेम अगन सुलगाने को तो

हैं माचिस की तीली आँखें

 

गम  तो है  वैसे का वैसा

रोतीं  खाली-पीली  आँखें

 

सुन लेतीं सब कह देतीं सब

कहने  को  शर्मीली  आँखें

 

 "मौलिक एवं अप्रकाशित "

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 9, 2017 at 9:38am

आदरणीय  Gajendra shrotriya जी हौसलाअफजाई के लिए आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by Samar kabeer on August 8, 2017 at 9:42pm
'साजिशन'की कोई एक मिसाल पेश कीजिये,अगर ये आम है तो,और मिसाल गूगल से नहीं साहित्य से पेश कीजियेगा,शुक्रगुज़ार रहूँगा ।
Comment by Niraj Kumar on August 8, 2017 at 7:21pm

जनाब समर कबीर साहब, आदाब, 

'साजिशन' हिंदी में अब आम प्रोयोग का हिस्सा है 'सकुचीली' नहीं है. आप दोनों शब्द गूगल पर सर्च करें फर्क का पता चल जाएगा. 

सादर 

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 8, 2017 at 7:20pm

श्री  बसंत कुमार शर्मा जी,
बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है | सभी शेर बहुत उम्दा हैं | निम्न शेर के लिए विशेष मुबारकबाद भाई :
" बढती बेलें देख के’ अपनी

होतीं  हैं    गर्वीली  आँखें"

 सप्रेम | 

Comment by Samar kabeer on August 8, 2017 at 7:07pm
जनाब नीरज साहिब आदाब,यहां आपको 'सकुचीली का प्रयोग खटक रहा है,और जनाब गिरिराज भाई की ग़ज़ल पर आप 'साजिशन'के प्रयोग की हिमायत कर रहे हैं,ये दो बातें क्यों ?
Comment by Niraj Kumar on August 8, 2017 at 7:02pm

आदरणीय बसंत जी, अच्छी ग़ज़ल हुयी है दाद के साथ मुबारकबाद.

मतले में संकोची के अर्थ में सकुचीली का प्रयोग थोड़ा खटकता है.

सादर 

Comment by Samar kabeer on August 8, 2017 at 6:39pm
जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Gajendra shrotriya on August 8, 2017 at 1:11pm
वाहह!आँखो से झलकते विविध रंगों को बखूबी दर्शाया है आपने आ० बसंत कुमार जी। बहुत बधाई आपको।
Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 8, 2017 at 11:17am

आदरणीय Mohammed Arif जी हौसलाफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 8, 2017 at 11:17am

आदरणीय Ravi Shukla  जी आपके स्नेह को सादर नमन 

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