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बह्र:1222 1222 122

नहीं पहले-सी चेहरे पे चमक है
हँसी में आपकी गम की झलक है

नहीँ आमाल में जिसकी है नीयत
उसी की क़ामयाबी पे भी शक है

कोई तो खेल में पानी बहाता
कहीं पर प्यासा मरने की धमक है

पहुँचना उसका ही होगा फलक तक
नज़र जिसकी बहुत आगे तलक है

रहेगी रात तन्हा, दिन अकेला
हमारा साथ कुछ ही देर तक है

उसे बंदिश भला क्या रोक पाए?
नजर में जिसकी ये सारा फलक है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 11, 2017 at 7:29am
आदरणीय बृजेश भाई जी सादर हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 11, 2017 at 7:28am
आदरणीय रवि शुक्ल सर सादर नमन!हौंसलाफ़ज़ाई और मार्गदर्शन के लिए बहुत् बहुत आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 11, 2017 at 7:27am
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 11, 2017 at 7:26am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी सादर नमन!उत्साहवर्धN एवं मार्गदर्शन के लिए तहेदिल शुक्रिया। यथोचित परिष्कार का प्रयत्न किया है सादर।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 8, 2017 at 1:00pm
वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर
Comment by Ravi Shukla on August 8, 2017 at 9:59am

आदरणीय सतविन्‍द्र जी अच्‍छी गजल कही आपने मुबारबाद पेश करते है ।  आदरणीय समर साहब का कहना सही है हक़ काफिया उर्दू के अनुसार गलत हो जाएगा पर हम सब अभी हिन्‍दी कोआधार मानकर गजल पर प्रयास कर रहे है इसलिये   उर्दू की जानकारी के अभाव में इस  तरह की गलती होना स्‍वाभाविक है । हमने इसी लिय पिछले कुछ समय से उर्दू सीखना शुरू कर दिया है । पर नियमित अभयास नहीं हो पा रहा है । आदरणीय गिरिराज भाई जी की बात पर भी ध्‍यान दीजियेगा ।

Comment by नाथ सोनांचली on August 7, 2017 at 8:18am
आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर मेरी बधाई निवेदित है । सादर
Comment by Mohammed Arif on August 6, 2017 at 11:22pm
आदरणीय सतविंद्र जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल का प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आदरणीय गिरिराज भंडारी जी और आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों पर ध्यान दें । मैं इन विद्वानों की बातों से सहमत हूँ ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2017 at 9:48pm
आदरणीय समर कबीर जी सादर वन्दन! हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत आभार। आपके सुझाए गए दोष के निवारण के लिए प्रयास करूँगा।सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2017 at 9:46pm
आदरणीय गिरिराज सर,प्रयास पर पुनः उपस्थित होकर मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत आभार, आपके सुझाव के अनुसार परिष्कार का निवेदन करूँगा। सादर

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