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आसक्ति …….

परिचय  हुआ  जब   दर्पण से
तो  चंचल  दृग   शरमाने  लगे 
अधरों  पे कम्पन्न  होने   लगा 
पलकों  में  बिंब  मुस्काने  लगे ll


काजल मण्डित रक्तिम लोचन
अनुराग  निशा  से  बढ़ाने लगे 
कच क्रीडा में लिप्त समीर  से
मेघ  अम्बर  में  शरमाने  लगे ll


लज्ज़ायुक्त स्वर्णिम कपोल पे 
फिर  जलद नीर बरसाने लगे
कनक कामिनी  की काया पे
मधुप  आसक्ति  दर्शाने  लगे ll

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:50pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहिब , आदाब। ... सृजन के भावों को अपने मधुर शब्दों से उपकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:47pm

आदरणीय हरी प्रकाश दूबे जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से शोभित करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:47pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन के भावों को सहमति देती आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार ।

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:46pm

आदरणीय मोहित मिश्रा जी सृजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 5:59pm
मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब,सुन्दर खयाल आपने रचना में उकेरे हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 4:48pm

 सुन्दर रचना  हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना  सर ! सादर 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 3:47pm

बढ़िया रचना हुई है आदरणीय सुशिल सरना जी | हार्दिक बधाई |

Comment by Sushil Sarna on July 15, 2017 at 7:22pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on July 15, 2017 at 4:20pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by Sushil Sarna on July 13, 2017 at 3:48pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब, सृजन को अपने आत्मीय स्नेह से प्रशंसित करने का हार्दिक आभार। इंगित त्रुटि के बारे में आप बिलकुल सही हैं , मैं इसे अभी एडिट किये देता हूँ। आपकी इस आत्मीयता के लिए हार्दिक आभार।

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