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याद आता तब ख़ुदा जब आसरा कोई न हो

बह्र 2122 2122 2122 212

बे असर हों सब दुआएँ,और दवा कोई न हो
याद आता तब ख़ुदा जब आसरा कोई न हो ||

क्यूँ छुपाती हुस्न अपना हर घड़ी पर्दानशी
हुस्न वो किस काम का गर देखता कोई न हो ||

एक ख़्वाहिश है मेरी यारो ख़ुदा के फ़ज़्ल से
शैर इक ऐसा कहूँ, जैसा कहा कोई न हो ||

कौन आया है यहाँ पीकर,बता आब-ए-हयात
कौन सा घर है बता जिसमें मरा कोई न हो ||

दोष देना हो किसी को,देख लो ख़ुद आइना
ये भी तो सम्भव है कि तुमसे बुरा कोई न हो ||

दोष क़िस्मत का हमेशा ही नहीं होता मियाँ
कौन है जिसको यहाँ मौका मिला कोई न हो ||

दर्द सबका बाँट लें हमसब अगर मिलकर यहाँ
'नाथ' दावा है मेरा फिर गमज़दा कोई न हो ||

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on July 8, 2017 at 2:03pm
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 8, 2017 at 2:02pm
आ. सुरेन्द्रनाथ जी उम्दा गजल हुई है। मुबारकबाद।
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:36am
आद0 ब्रजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, गजल पर आपकी बधाई और उत्साहवर्धन के लिए आभार
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:34am
आद0 प्राची सिंह जी सादर अभिवादन, आपकी बधाई और उत्साहवर्धन के लिए हृदय तल से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:33am
आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन, गजल पर प्रोत्साहन भरी प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:32am
आद0 उस्ताद समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपको हृदय से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:30am
आद0 गुरुदेव रवि शुक्ल जी सादर प्रणाम, आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, सादर
Comment by नाथ सोनांचली on July 8, 2017 at 3:28am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल में शिरकत करने और उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार सँग नमन।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 7, 2017 at 8:46pm
आदरणीय सुरेन्द्र जी बहुत खूबसूरत यथार्थ से रूबरू करवाती ग़ज़ल..मतले से लेकर प्रत्येक शे'र लाजबाब..हार्दिक बधाई

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 7, 2017 at 1:33pm

 अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत हुई है 

सभी अशआर ज़िन्दगी को करीब से छूते हुए निकलते हैं 

हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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