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ग़ज़ल ( किस ने फूंके नशेमन तमाम )

ग़ज़ल
---------
212 -212 -2121 /212

उसपे वारा है जीवन तमाम ।
जिस में मौजूद हैं फ़न तमाम ।

सख़्त लहजे का अंजाम है
हो गए तुझ से बद ज़न तमाम ।

उनको देखूंगा जब तक नहीं
दिल की होगी न धड़कन तमाम।

अबतो आ जाओ बन कर बहार
उजड़ा उजड़ा है गुलशन तमाम ।

किस को सौंपें क़यादत भला
रहबरों में हैं रहज़न तमाम ।

पूछना है तो बिजली से पूछ
किस ने फूंके नशेमन तमाम ।

इश्क़ तस्दीक़ आसाँ नहीं
हैं निहाँ इस में बंधन तमाम ।

( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 23, 2016 at 6:43pm

मुहतरम जनाब मिथिलेश साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 22, 2016 at 11:36pm

आदरणीय तस्दीक जी, वाह वाह वाह.... क्या ही उम्दा ग़ज़ल कही है. शेर दर शेर दाद ओ मुबारकबाद कुबूल फरमाएं. सादर 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 22, 2016 at 9:37pm

मुहतरम जनाब गिरिराज साहिब , ग़ज़ल में शिरकत और आपकी हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 22, 2016 at 11:28am

आदरणीय तस्दीक भाई , उमदा गज़ल कही है , दिल से बधाइयाँ आपको ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 21, 2016 at 5:06pm

जनाब सुरेंद्र नाथ साहिब , ग़ज़ल की सराहना और आपकी हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by नाथ सोनांचली on November 21, 2016 at 5:52am
मोहतरम तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन,
आपकी गजल का हर शेर सवा शेर, बधाई निवेदित है।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2016 at 7:23pm

 जनाब आमोद बिंदोरी  साहिब  , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2016 at 7:19pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---

Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 20, 2016 at 6:39pm
बहुत खूब आ तस्दीक साहब

बधाई नमन
Comment by Samar kabeer on November 20, 2016 at 5:03pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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