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प्रार्थना(ग़ज़ल) -रामबली गुप्ता

वह्र= 221 1221 1221 122

हे! ईश! हे' जगदीश! दया मान व बल दो।
हो शीश पे' आशीष हमें ज्ञान-विमल दो।

कर दूर सभी द्वेष मलिन-भाव हृदय से।
प्रभु! काट तमस-बंध हृदय-ज्योति धवल दो।।

सुर-साज नया ताल नया राग नया रव।
प्रभु! छंद-नया गान-मृदुल कंठ-नवल दो।।

प्रभु! ध्यान रहो नित्य व अधरों पे' हमारे।
निज भक्ति-भरे भाव के' नव गीत-ग़ज़ल दो।।

हिय-बाग में' नित पुष्प खिलें रंग-बिरंगे।
प्रभु! उर के' सरोवर में' नया नेह-कमल दो।।

दारिद्र सभी दुःख-कलुष-भेद मिटा प्रभु!
सुख-शांति सुखद ठाँव व आनंद के' पल दो।।

मद आँधियों' का तोड़ सभी विघ्न मिटाएं।
तन-मन में' सहन-शक्ति प्रभो! धैर्य-अटल दो।।

प्रभु! राष्ट्र के' रक्षार्थ न पग पीछे' रखें हम।
भय ताप से' अरि पाएं' हृदय मे वो' अनल दो।।

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by रामबली गुप्ता on August 15, 2016 at 5:28pm
सादर आभार आद0 ब्रजेश कुमार जी
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 15, 2016 at 4:24pm

वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर सरस गीतिका का अवतरण हुआ है आपकी लेखनी द्धारा हार्दिक बधाई संग नमन 

Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:38pm
बहुत बहुत आभार आद0 सतविंदर जी
Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:35pm
आद0 गोपाल नारायन जी रचना आपको अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ।हार्दिक आभार आपको
Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:34pm
कल्पना जी सराहना के लिए बहुत बहुत आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 13, 2016 at 12:54pm
सुन्दरम् आदरणीय रामबली गुप्ता जी सादर हार्दिक बधाई।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 13, 2016 at 12:54pm
सुन्दरम् आदरणीय राम बली गुप्ता जी।हार्दिक बधाई
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 13, 2016 at 11:35am

आ० रामबली जी , आपको बधाई  क्योंकि यह हिन्दी भाषा की गजल लगती है . मैं ऐसी ही गजले हिन्दी में पसंद करता हूँ . सादर .

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 12, 2016 at 5:32pm
बहुत अच्छी रचना हुई है आदरणीय बधाई स्वीकारें ।
Comment by रामबली गुप्ता on August 11, 2016 at 10:41pm
हृदय से आभार आद0 समर भाई जी

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