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उदास चेहरा ...

तुम आये
और मैं तुम्हें
बंद पलकों से
निहारती रही
तुम्हारी हर आहट को
मैं अपने अंदर समेटती रही
वो चुप सा
तुम्हारा उदास चेहरा
मेरी मजबूरी को कचोटता रहा
तुम्हारे हाथों के गुलाब की
इक इक पंखुड़ी
अश्कों में भीगी
मुझपर गिरती रही
मैं तुम्हारे अश्कों की आतिश में
इक शमा सी पिघलती रही
तुम ज़मीं तक
मुझपर झुकते चले गए
बेबस पुकार मुझसे टकराकर
कहीं खला में खो गयी
तुम मेरी लहद में
आ न सके
मैं अपनी लहद में
तड़पती रही
शाम का धुंधलका बढ़ता गया
और बढ़ती गयी मेरी तन्हाई भी
बंद पलकों की चिलमन से
बेबस सी मैं तुम्हें
जाते हुए निहारती रही

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 709

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 7:38pm

आदरणीया प्रतिभा जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by pratibha pande on May 26, 2016 at 6:50pm

कोमल एहसासों से ओतप्रोत ,सुन्दर रचना ,हमेशा की तरह ,  हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीय सुशील सरना जी 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:49pm

आदरणीया राहिला जी प्रस्तुति में निहित भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:47pm

आदरणीय बशर भारतीय जी आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:46pm

आदरणीय  समर कबीर साहिब प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय सराहना का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:45pm

आ. कल्पना भट्ट जी प्रस्तुति के  भावों को मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Rahila on May 26, 2016 at 12:03pm
बहुत ही खूबसूरत रचना आदरणीय सर जी! बहुत, बहुत बधाई ।सादर नमन
Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:24am
वाहहह अच्छी भावपूर्ण रचना है बधाई आपको
Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 10:55pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,हमेशा की तरह शानदार कविता रच दी आपने,वाह बहुत ख़ूब,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 8:59pm

वाह | बहुत सुंदर पंक्तियाँ | हार्दिक बधाई आदरणीय | 

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