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चंद शेर आपके लिए

एक।

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता है
जब दर्द को दबा जानकार पिया मैंने

दो.

वक्त की मार सबको सिखाती सबक़ है
ज़िन्दगी चंद सांसों की लगती जुआँ है

तीन.

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है

चार.

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था

"मौलिक व अप्रकाशित"
प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Views: 550

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 9, 2016 at 12:18pm

अच्छे खयाल से भरपूर आशआर ! दाद कुबूल हो 

Comment by Sushil Sarna on February 25, 2016 at 8:00pm

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है ..... आदरणीय शे'रों का ये गुलदस्ता बहुत मन भाया ... हार्दिक बधाई।

Comment by kanta roy on February 25, 2016 at 10:44am
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था...... वाह ! बहुत खूब शेर हुए है आपके आदरणीय मदन मोहन जी । बधाई प्रेषित है ।

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