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रंगों की दुनिया में असुरक्षा का माहौल बनता देख लाल ,पीले और नीले रंग के मंत्रियों ने सफ़ेद रंग के सरदार से आपात मीटिंग बुलाने को कहा /हर तरह के रंगों को आमंत्रित किया गया /.... मीटिंग शुरू हुई --मुद्दा था ऐसा क्या करें कि हर वर्ग हमें प्यार से देखे /..... लाल और पीले रंग बोल उठे ,हमारे रंग को हिन्दुओं ने पसंद कर लिया ,मुसलमान हमारी तरफ अजीब नज़रों से देखते हैं /.... नीले और पीले एक साथ  कहने लगे हम दोनों से बने हरे रंग को मुसलमानों ने अपना लिया , हिन्दू हमें नफरत की नज़र से देखते हैं /..... इसी बीच शोहरत ,ग़ुरूर और दौलत  के रंग तैश में बोले हम अमीरों के हिस्से में आगये ,गरीब हम तक पहुँच नहीं पाते /........ हर रंग अपनी अपनी दास्ताने बर्बादी अपने तरीक़े से बयान कर रहा था और स्टेज पर विराजमान सफ़ेद रंग जो ख़ुद अपने आप में रंग नहीं कई रंगों का मिश्रण है सबकी दलीलें सुन कर धीरे धीरे मुस्करा रहा था। ...... 

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(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 4, 2016 at 8:41pm

जनाब मिथिलेश साहिब ,  हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 4, 2016 at 12:07am

रंगो को प्रतीक बनाकर बहुत बढ़िया लघुकथा लिखी है आदरणीय तस्दीक जी. हार्दिक बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 3, 2016 at 7:44pm

मोहतरमा प्राची सिंह साहिबा , हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 3, 2016 at 3:25pm

रंगों के माध्यम से विकृत व्यस्था और रंगों को धर्मों से जोड़ देने वाली सोच पर कटाक्ष हुआ है..

लेकिन मोहब्बत का रंग सफ़ेद मुस्कान में नज़र नहीं आया वहां तो कुछ कुटिल छवि उभरी है 

प्रस्तुति सशक्त हुई है 

हार्दिक बधाई

Comment by मनोज अहसास on February 2, 2016 at 8:59pm
वाह कबीर साहब
सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 2, 2016 at 8:42pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,  सफ़ेद सूरज की किरण जो खुद सात रंगों से बनी है , मुहब्बत का रंग बन कर सारी दुनिया को फ़ायदा पहुंचा रही है / तो असली रंग लाल , पीला और नीला ऐसा क्यों नहीं कर सकते। .... यह सिर्फ तसव्वुर पर बेस है। ..... शुक्रिया

Comment by Samar kabeer on February 1, 2016 at 10:37pm
फिर क्या हुआ ?

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