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कैसे अपने मधु पलों को .... (१००वी रचना )

कैसे अपने मधु पलों को शूल शैय्या पे छोड़   आऊँ
स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊं

विगत पलों के अवगुंठन में
इक दीप अधूरा जलता रहा
अधरों पर   लज्जा शेष रही
नैनों में स्वप्न मचलता रहा

एकांत पलों में तृप्ति भाव को किस आँगन मैं छोड़ आऊँ
प्रिय स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊँ

अधरों से मिलना अधरों का
तिमिर का मौन शृंगार हुआ
तृषित देह का देह मिलन से
अंगार पलों  का संचार हुआ

किस पल को मैं बना के जुगनू तिमिर देश में छोड़ आऊँ
प्रिय  स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊँ

वज्र क्षणों की मृदु रज कण से
अलंकृत सुधियों की श्वास हुई
अभिषेक पीर का हुआ नीर से
कम्पित उर की  हर आस हुई

लोचन के मैं अश्रु कलश को किस मेघ देश में छोड़ आऊँ
प्रिय स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन  तोड़ आऊँ

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on November 5, 2015 at 2:32pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी रचना की प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय  प्रशंसा  का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2015 at 2:31pm

आदरणीय उस्मानी साहिब रचना की प्रस्तुति पर आपकी स्नेहमयी प्रशंसा एवं अमूल्य सुझाव का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2015 at 2:28pm

आदरणीय मनोज कुमार जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल उपस्थिति का हार्दिक आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 5, 2015 at 1:40pm

आदरणीय सुशील सरना भाई , बहुत सुन्दर भाव पूर्न गीत की रचना हुई है , हार्दिक बधाइयाँ आपको ।
आदरणीय मात्रा विन्यास पंक्तियों मे एक से नही लग रहे हैं , जिसके कारण गेयता मे कुछ कमी महसूस हुई है , देखियेगा ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 5, 2015 at 12:21pm

आदरणीय सुशील सरना सर, शतकीय प्रस्तुति पर आपको बहुत बहुत बधाई 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 5, 2015 at 9:10am
बेहतरीन शिल्पबद्ध भावपूर्ण झकझोर देने वाली काव्य रचना संग पहले शतक की उत्कृष्ट उपलब्धि पर हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आपको आदरणीय सुशील सरना जी। यदि इस रचना को ऐसा कोई शीर्षक प्रदान कर दें, तो कैसा रहेगा ? : 1-“ विरहपाश” 2- “स्मृति-घटों पर विरहपाश” 3- “बंधन विरहपाश के”
-- सादर एक विचार मात्र !
Comment by मनोज अहसास on November 5, 2015 at 6:11am
नमस्कार सर
इस खूबसूरत रचना के लिए बधाई
सादर

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