For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अमर गंध …

पी के संग सो गयी
पी के  रंग हो गयी
प्रीत  की  डोर  की
मैं  पतंग  हो गयी
दीप   जलता  रहा
सांस  चलती  रही
पी की  बाहों में  मैं
इक उमंग हो गयी
हर  स्पर्श  देह  में
गीत  भरता   रहा
नैनों की झील की
मैं  तरंग  हो गयी
निशा  ढलती  रही
आँखें  मलती  रही
होठों  की  होठों से
एक  जंग  हो गयी
कुछ  खबर  न हुई
कब सहर हो गयी
साँसों में पी की मैं
अमर गंध हो गयी

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 483

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on November 7, 2015 at 4:48pm

आदरणीय  Abid ali mansoori  जी रचना की इस आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Abid ali mansoori on November 6, 2015 at 11:09pm

हर  स्पर्श  देह  में 
गीत  भरता   रहा 
नैनों की झील की 
मैं  तरंग  हो गयी 

कुछ  खबर  न हुई 
कब सहर हो गयी 
साँसों में पी की मैं 
अमर गंध हो गयी

आदरणीय सुशील सरना जी बहुत बढ़िया प्रस्तुति हुई है वधाई आपको!

Comment by Sushil Sarna on November 6, 2015 at 1:09pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी रचना की में निहित भावों को सहमिति देती आपकी इस आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 6, 2015 at 1:08pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी रचना की भाव समीर ने  आपको छुआ , मेरा सृजन सफल हुआ। इस  आत्मीय स्नेह का हार्दिक आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 6, 2015 at 12:11pm

आदरणीय सुशील सरना सर बहुत सुन्दर प्रस्तुति हुई है हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 6, 2015 at 10:24am

लाजवाब !! आ. सुशील भाई बहुत सुन्दर गीत रचना हुई है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service