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सिर्फ देखा है जी भर के …

सिर्फ देखा है जी भर के …

सिर्फ देखा है जी भर के  हमने तुम्हें
इस ख़ता पे  न  इतनी सज़ा दीजिये
ज़िंदगी भर हम ग़ुलामी करेंगे मगर
रुख़ से चिलमन ज़रा ये हटा दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर  के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न  इतनी  सज़ा दीजिये

हम फ़कीरों  का  दर कोई होता नहीं
हर दर  पे  फ़कीर  कभी  सोता नहीं
अब  खुदा  आपको  हम बना बैठे हैं
अब पनाह दीजिये या मिटा दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये

आप के  प्यार में इस कदर खो गए
जाने  बाहों  में कब आपकी सो गए
होश  हो  न हमें अब सुबह शाम का
अपनी नज़रों से ऐसी पिला दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये


नींदों में ख़्वाब थे  ख़्वाब  में  आप थे
हम कहाँ दूर थे  बस  आपके  पास थे
आप ही से  क्यूँ  दूरी न  मिटाई गयी
इस दिल को बस इतना  बता दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 698

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 8, 2015 at 4:07pm

आदरणीया कान्ता रॉय जी रचना पर आपके आत्मीय प्रशंसात्मक उदगारों का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2015 at 4:04pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2015 at 4:04pm

आदरणीयvinaya kumar singh जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा  का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2015 at 4:02pm

आदरणीय Mohan Sethi 'इंतज़ार' जी रचना पर आपके स्नेहासक्त शब्दों का हार्दिक आभार। 

Comment by kanta roy on July 8, 2015 at 4:01pm
नींदों में ख़्वाब थे  ख़्वाब  में  आप थे
हम कहाँ दूर थे  बस  आपके  पास थे
आप ही से  क्यूँ  दूरी न  मिटाई गयी
इस दिल को बस इतना  बता दीजिये ........... वाह !!!! बेहतरीन ... गजब के भाव है...... बधाई आपको आदरणीय सुशील सरना जी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 8, 2015 at 2:05pm

आदरणीय सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

Comment by विनय कुमार on July 7, 2015 at 11:50pm

बहुत सुन्दर रचना आदरणीय ,// अब  खुदा  आपको  हम बना बैठे हैं अब पनाह दीजिये या मिटा दीजिये// , वाह , बधाई आपको ..

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 7, 2015 at 4:50pm

आदरणीय सुशील सरना जी बहुत सुंदर रचना हुई है .....क्या खूब कहा है ..

आप ही से  क्यूँ  दूरी न  मिटाई गयी 
इस दिल को बस इतना  बता दीजिये

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