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गजल-सुख की भी दोस्त गम सी तासीर बन गयी है।

221 2122 221 2122

नाकामयाबी मेरी तकदीर बन गयी है।
अब जिन्दगी ये गम की तस्वीर बन गयी है।।

मरहम समय का भी कुछ आराम दे न पाया।
ये चोट अब जिगर की जागीर बन गयी है।।

उलझी पडी है उल्फत की बेडियों में साँसें।
यादों से मिल के धडकन भी तीर बन गयी है।।

सुनती है गर कहीं तू इक बार आ के मिल ले।
रो रो के मेरी हालत गम्भीर बन गयी है।।

हँसता हुँ तब भी चहरा छोडें नहीं उदासी।
सुख की भी दोस्त गम सी तासीर बन गयी है।।

आँखों ने आँसुओं से चहरे पे लिख दिया है ।
गुरबत जमाने में इक तकसीर बन गयी है।।

उसके लिए मुहब्बत इक खेल था एे 'राहुल'।
तेरे लिए तो आँखों का नीर बन गयी है।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rahul Dangi Panchal on July 6, 2015 at 7:04am
आदरणीय Saurabh Pandey जी बस आपका आशिर्वाद है। जनाब से निवेदन है क्रपया समय समय पर इसी तरह मार्ग दर्शन करते रहें। यह हमारे जैसे नौसिखियाओं के लिए वरदान समान है। सादर नमन
Comment by Rahul Dangi Panchal on July 6, 2015 at 7:02am
आदरणीय Saurabh Pandey जी

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2015 at 12:51am

भाई राहुल डांगीजी, आपकी प्रस्तुत ग़ज़ल सँभल-सँभल कर हुई है. लाज़िमी भी है. लेकिन ग़ज़ल बेहतर हुई. ऐसे ही अभ्यासरत रहें.
शुभकामनाएँ

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 3:27pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी शुक्रिया मैंनें समर कबीर जी के सुझाव अनुसार सुधार कर रहा हुँ बस व्यस्त बहुत ज्यादा हुँ इसलिए जल्दी सुधार नहीं कर पा रहा हुँ जिम्मेदारीयों से उलझा पडा हुँ सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 18, 2015 at 3:01pm

आदरणीय राहुल भाई , क्या खूब गज़ल कही है , वाह !! हार्दिक बधाइयाँ स्वीकर कीजिये । आ, समर भाई जी का कहना उचित है । बदलाव कर लीजियेगा ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 1:45pm
आदरणीय वीनस भाई जी शुक्रिया आदरणीय
Comment by वीनस केसरी on June 18, 2015 at 1:41pm

वाह बहुत शानदार ग़ज़ल प्रस्तुत की है
बहुत खूब

समर साहब की इस्लाह पर गौर फरमाएं तो दोष भी दूर हो जायेगा ...

Comment by Samar kabeer on June 17, 2015 at 10:52pm
बिल्कुल बदलना होगा,मैंने पहले ही लिख दिया था आप इस के लिये सक्षम हैं ,देखिये एक इशारे में आपने अपनी दूसरी ग़लती ख़ुद ही पकड़ ली ।
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 17, 2015 at 9:35pm
आदरणीय Kewal Prasad जी सादर धन्यवाद
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 17, 2015 at 6:58pm
आदरणीय Kewal Prasad जी शुक्रिया

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