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ग़ज़ल -- ये ज़मीं सारी मेरा घर कह लें ( गिरिराज भंडारी )

2122   1212    22  / 112 

ये ज़मीं सारी मेरा घर कह लें

आप आयें जहाँ से, दर कह लें

 

जो कमाता है, बांटने के लिये 

है तो इंसाँ,  मगर शज़र कह लें

 

जान रखता हूँ मै हथेली पर

दोस्त माना मुझे अगर कह लें

 

सच को सच बोलने की आदत है  

मेरी राहों को पुर ख़तर कह लें

 

आपके दर पे मांगने आया

आप चाहें,  अगर- मगर कह लें

 

दिल के जज़्बात पिरो लाया हूँ

बिन पढ़े आप बे असर कह लें

 

मेरे अहबाब मेरी क़ुव्वत हैं

मेरी ख़ातिर, हैं बाल-ओ- पर कह लें

 

भीड़ मेरी तरफ जो लगती है

अस्ल में है उधर , उधर कह लें

 

मै ने बस आइना दिखाया था

अब ग़लत मुझको उम्र भर कह लें  

 

आग लगती है मेरी बातों से

आप अब से उन्हें शरर कह लें 

****************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 15, 2015 at 5:31am

आदार्णीय कृष्णा भाई , सराहना के लिये आपका आभार ।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 14, 2015 at 10:15pm

आग लगती है मेरी बातों से

आप अब से उन्हें शरर कह लें..........लाजवाब!

बहुत सुन्दर गजल हुयी है आ० गिरिराज सर!हार्दिक नमन!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 14, 2015 at 6:17pm

आदरणीय श्री सुनील भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका बहुत आभार  ॥

Comment by shree suneel on June 14, 2015 at 8:56am
आपके दर पे मांगने आया
आप चाहें, अगर- मगर कह लें.. व्वाहह! क्या बात!
अशआर ख़ूब भाये. इस शानदार ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाई आपको आदरणीय.
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 13, 2015 at 8:30pm

आ०अनुज

बेमिसाल ----बेमिसाल क्या गजल कही है , आपको बधायी .

Comment by विनय कुमार on June 13, 2015 at 7:09pm

// मै ने बस आइना दिखाया था
अब ग़लत मुझको उम्र भर कह लें // , बहुत खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय गिरिराज भंडारी जी , बधाई क़ुबूल करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 13, 2015 at 6:59pm

आदरणीय समर कबीर भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on June 13, 2015 at 6:37pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,ख़ूबसूरत और शानदार ग़ज़ल के लिये शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 13, 2015 at 5:29pm

आदरणीय वीनस भाई , ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ॥

Comment by वीनस केसरी on June 13, 2015 at 4:43pm

वाह वा
बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है ....

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