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जिसे हर शय में................'जान' गोरखपुरी

१२२२ १२२२

जिसे हर शय में देखा था

नजर का मेरी धोखा था।

भरम तेरी निगाहों का

कोई जादू अनोखा था।

सदी बीती जहां लम्हों

मेरा जग वो झरोखा था।

बरसतीं खार आखें अब

लबों सागर जो सोखा था।

गया न इश्क खूँ रब्बा

चढ़ाया रंग चोखा था।

नसीबी ‘’जान’’ रोये क्यूँ

ख़ुदा का लेखा जोखा था।

******************************************

मौलिक व् अप्रकाशित (c) ‘जान’ गोरखपुरी

******************************************

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Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 9:46am

सुन्दर ग़ज़ल,,बधाई आपको भाई कृष्ण मिश्र जी ! सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 26, 2015 at 7:39am
बहुत सुन्दर प्रस्तुति, प्रिय कृष्ण जी , बधाई , सादर।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 10:57pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी!रचना पर आपकी सराहना पाकर रचनाकर्म सफल हुआ!लिखना सार्थक हुआ!बहुत बहुत आभार!सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 25, 2015 at 10:41pm

छोटी बहर पर सुन्दर प्रस्तुति बहुत बहुत बधाई आपको कृष्ण जी 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 10:25pm

आदरणीय! दिनेश सर आप जैसे फनकार से दाद पाकर मन हर्षित हुआ!!सदैव स्नेह बनाये रखें!सादर!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 10:23pm

आदरणीय मिथिलेश सर हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत आभार! इस मंच और आप जैसे गुनीजनों के सानिध्य में सीख़ रहा हूँ!मेरा सौभाग्य है!आ० आपके मार्गदर्शन का सदैव आकान्छी हूँ!इसी प्रकार कृपा बनाये रक्खें!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 10:18pm

आ० samar kabeer सरजी! आप जैसे गजलकार से दाद पाकर मन झूम-झूम गया है!आपके स्नेह एवम् मार्गदर्शन का सदैव आकान्छी हूँ!बहुत बहुत आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 10:16pm

आदरणीय मोहन सेठी 'इन्तजार' सर!आपका हौसलाफजाई मुझे बहुत बल प्रदान करती है! बहुत बहुत आभार सरजी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 25, 2015 at 7:27pm

वाह वाह आदरणीय कृष्ण भाई जी छोटी बह्र में अच्छी ग़ज़ल हुई ..... बहुत बहुत बधाई 

Comment by दिनेश कुमार on March 25, 2015 at 7:19pm
वाह, अच्छी व प्यारी ग़ज़ल। बधाई स्वीकार करें भाई "जान" गोरखपुरी साहिब।

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