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"देख बड़ी बहू तूने छोटी बहू को लेकर डाॅक्टरो के बहुत चक्कर लगा लिये, इससे कुछ नही होगा?" हस्पताल से देवरानी का चेकअप कराकर रमा घर लौटी ही थी कि सासु माँ शुरू हो गयी। "अब तो स्वामी जी की दया हो तो ही छोटी की गोद में किलकारी गूँजेगी।" सासु माँ का बोलना जारी था।
"कल ही स्वामीजी से बात करके ले जाऊँगी इसे उनके आश्रम में 'सप्त रात्रि' की पूजा के लिये।"
"बड़ी बहू अगर तू भी पूजा छोड़ बीच में नही भाग आयी होती तो उन के आर्शीवाद से आज तेरी गोद भी...........।
"बस कीजिये माँजी।" रमा पुरानी बाते याद कर क्रोध में आ गयी। "अब कहीं नही जायेगी छोटी, अब जाना है तो इसके पति को अपने चेकअप के लिये। छोटी को अपनी संतान चाहिये न कि समाज को दिखाने के लिये वंश चलाने वाली आर्शीवादी औलाद।"

"विरेन्दर वीर मेहता"
(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vandana on March 28, 2015 at 8:12pm

बहुत बढ़िया सन्देश सार्थक लघुकथा आदरणीय 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 26, 2015 at 11:26pm

बहुत अच्छी लघुकथा कही आदरणीय , संदेश भी सार्थक है , आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 26, 2015 at 3:05pm

सार्थक  सन्देश देती  लघु कथा  के  लिए बधाई  श्री विरेंदीर वीर  मेहता  जी  

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 26, 2015 at 10:17am

आदरणीय मितिलेश वामनकर जी, भाई जीतेंदर  पस्तारिय जी, सोमेश कुमार जी, सौरभ पांडेयजी और हरी प्रकाश दुबेजी ..... कथा पर आप लोगो  की उपस्तिथि और प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया ......

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 26, 2015 at 10:10am

सबसे पहले मैं अपने समय अभाव के कारण  प्रतिक्रिया न दे पाने और 'जल्दी जल्दी में' अपनी रचना पोस्ट करते समय त्रुटियो का ध्यान न रखने के लिए सभी आदरणीय सुधिजनो से  क्षमा चाहता हु.

कथा को समय देने के लिए और उन पर अपनी मूल्यवान  प्रतिक्रिया देने की लिए आप लोगो ..... आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी, विनय कुमार जी , डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, कृष्णा मिश्र जी, और आदरणीय राजेश कुमारी जी .... का तहे दिल से आभारी हूँ.

Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 9:53am

आदरणीय वीर मेहता जी ,सुन्दर लघु  कथा ,बधाई ! सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 25, 2015 at 10:48pm

ऐसी रचनाएँ आवश्यक हैं. बधाई भाईजी.

परन्तु, आशीर्वाद को संशोधित कर लें.

सुभेच्छाएँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 25, 2015 at 10:21pm

बहुत अच्छा जबाब बड़ी बहू  का इस घिनौने अंधविश्वास का खात्मा भी नारियों को ही करना चाहिए एक शिक्षाप्रद लघु कथा बहुत बढ़िया हार्दिक बधाई आपको वीरेंद्र वीर जी .

Comment by somesh kumar on March 25, 2015 at 11:27am

सुंदर स्पष्ट एवं संक्षिप्त ,अंधविश्वास ,नारी-शोषण और समाजिक दकियानूसी पर प्रहार करती लघुकथा |बधाई भाई जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 25, 2015 at 10:37am

 एक कडवा और शर्मनाक सत्य का बखूबी चित्रण किया आपने,आदरणीय वीर जी. बहुत-बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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