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कुछ नये काफ़िये --- ग़ज़ल धार समय की --३

किस सागर में जान मिलेगी धार समय की

कौन पकड़ पाया जग में रफ़्तार समय की

तेरी यादों की बूबास घुलेगी ज्यूं ज्यूं

बढ़ती जाएगी त्यूं त्यूं महकार समय की

वक़्त कहाँ मिलता है दुनियावी पचड़ों से

मेरी ग़ज़लें सारी है बेकार समय की

वक़्त सिकंदर विश्व-विजेता सदियों से है

सुल्तानी लाफ़ानी है सरदार समय की

चंदा-सूरज गगन-पवन सब मौन खड़े हैं

आयु कौन बतलायेगा सुकुमार समय की

बैर भूलकर मीत बनें  सब  एक रहें सब 

सच मानो तो आज यही दरकार समय की 

'खुरशीद'-ओ-महताब सफ़ीने घूम रहे हैं

जाने कब होगी यह नदियाँ पार समय की

मौलिक व अप्रकाशित  

 

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 3, 2015 at 4:18pm

आ0  खुर्शीद जी

समय को आपने पकड़ लिया या समय ने आपको  i फिलहाल शेरो के बादशाह है आप i बधाई हो i

Comment by Shyam Narain Verma on January 3, 2015 at 10:04am

बहुत लाजवाब, बधाई , सादर ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 3, 2015 at 7:30am

वक़्त कहाँ मिलता है दुनियावी पचड़ों से
मेरी ग़ज़लें सारी है बेकार समय की...........  क़ुर्बान ! क़ुर्बान !! क़ुर्बान !!!

मक़्ते के लिए एक बार फिर से विशेष बधाइयाँ..

अब कुछ मेरी ओर से भी .. .

ज्यूं-ज्यूं तेरी यादों की बूबास घुले है..
त्यूं-त्यूं बढ़ती जाए है महकार समय की


चंदा-सूरज गगन-पवन सब मौन खड़े हैं
आयु कौन बतलायेगा सुकुमार समय की // .. बतलायेगा कौन आयु सुकुमार समय की
वैसे ये बेज्जोड़ शेर है.. ..

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 8:15pm

वाह ..बहुत सुन्दर प्रयोग..धार समय की ..

किस सागर में जान मिलेगी धार समय की

कौन पकड़ पाया जग में रफ़्तार समय की...सुन्दर मतला से अशआर लाजबाब...बधाई आपको.

Comment by Anurag Prateek on January 2, 2015 at 7:36pm

 चंदा-सूरज गगन-पवन सब मौन खड़े हैं,

उम्र कौन बतलायेगा सुकुमार समय की, --- वाह वाह  

Comment by Anurag Prateek on January 2, 2015 at 7:25pm

अद्भुत 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 2, 2015 at 6:11pm

 चंदा-सूरज गगन-पवन सब मौन खड़े हैं,आयु कौन बतलायेगा सुकुमार समय की,

 आदरणीय खुरशीद जी , सुन्दर रचना पर हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 2, 2015 at 4:18pm
क्या बात है खुर्शीद सर ! आपने तो काफ़िया की बौछार कर दी। बहुत बेहतरीन हुई ग़ज़ल। उम्दा अशआर। मोबाइल से टीप कर रहा हूँ इसलिए संक्षिप्त है। लिखा कम समझे ज्यादा की तर्ज पर उम्दा, बेहतरीन । दिल से दाद कुबूल फरमाये।

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