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नैन कटीले …

नैन कटीले होठ रसीले
बाला ज्यों मधुशाला
कुंतल करें किलोल कपोल पर
लज्जित प्याले की हाला
अवगुंठन में गौर वर्ण से
तृषा चैन न पाये
चंचल पायल की रुनझुन से मन
भ्रमर हुआ मतवाला
प्रणय स्वरों की मौन अभिव्यक्ति
एकांत में करे उजाला
मधु पलों में नैन समर्पण
करें प्रेम श्रृंगार निराला

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 789

Comment

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Comment by Sushil Sarna on November 11, 2014 at 12:03pm

आदरणीया vijay nikore   जी रचना पर आपकी स्नेहिल  प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 11, 2014 at 12:02pm

आदरणीया  Dr.Prachi Singh    जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 11, 2014 at 12:01pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी रचना पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार। 

Comment by vijay nikore on November 10, 2014 at 4:10pm

सुन्दर, मनभावन, सजीली रचना के लिए बधाई आ० सुशील जी।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 10, 2014 at 1:29pm

आ० सुशील सरना जी 

शृंगार पर सुन्दर प्रयास  हुआ है..

हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2014 at 5:20am

आ. सुशील सरना जी , सुन्दर शृंगार रचना के लिये दिली बधाई !

Comment by Sushil Sarna on November 9, 2014 at 4:56pm

 आदरणीय   ram shiromani pathak    जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on November 9, 2014 at 4:55pm

आदरणीया   Chhaya Shukla    जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by ram shiromani pathak on November 9, 2014 at 2:27pm

सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय  //हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Chhaya Shukla on November 8, 2014 at 9:17pm

सुंदर श्रृंगारिक रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरनीय !

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