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एक बार फिर आओ न वैदेही
फिर राम की बनो सनेही
इस बार उसके साथ वन में मत जाओ
उसे ले चलो किसी शहर की ओर
जहाँ अनगिनत रावण तुम्हारे
अपहरण का स्वप्न सजाये बैठे हैं.
रावण द्वारा अपहृत हो जाओ,
इन नए राक्षसों के विनाश का
तुम फिर से कारण बनो.
एक नया संसार बसाओ
इनका अब संहार कराओ.

तनिक फिर भृकुटि बनालो
राम को फिर से बुला लो.

मौलिक व अप्रकाशित
विजय प्रकाश शर्मा

Views: 782

Comment

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Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 13, 2014 at 1:43pm

आ विजय निकोर जी ,
सत्य वचन माननीय , हम अगर ऐसा कर पाएं.
इस रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार .

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 13, 2014 at 1:40pm

आ मीना पाठक जी ,
इस सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार .

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 13, 2014 at 1:39pm

आ राजेश कुमारी जी ,
आपका बहुत आभार . हमें आशावान रहना होगा
राम को तो आना ही होगा क्योंकि वे स्वयं से प्रतिज्ञा बद्ध हैं -".विनाशाय च दुष्कृताम==== -सम्भवामि युगे- युगे",

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 13, 2014 at 1:36pm

आ जितेन्द्र 'गीत' जी ,
आपका बहुत आभार .
आपका कहना सत्य है-वास्तविकता कछ और है- लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है विस्फोटक तब होगा जब "बडहिं लम्पट चोर जुआरा,हर आनहिं पर धन अरु दारा" ऐसी स्थिति में राम को तो आना ही होगा क्योंकि वे स्वयं से प्रतिज्ञा बद्ध हैं -".विनाशाय च दुष्कृताम==== -सम्भवामि युगे- युगे",

Comment by vijay nikore on October 12, 2014 at 12:43pm

हम सभी अपने मन में राम जी को बसाए रखें, औरों में भगवान को देखें... यह संसार बदल जाएगा ... लगेगा कि राम जी ने अवतार लिया है।

इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय विजय जी।

Comment by Meena Pathak on October 12, 2014 at 11:48am

बेहद उम्दा रचना ..बधाई आदरणीय विजय जी | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 11:20am

काश कोई राम फिर से अवतार ले इन राक्षसों का संहार करने ..उन्नत भाव ..उम्दा रचना हार्दिक बधाई आपको आ० विजय प्रकाश जी .

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 12, 2014 at 10:17am

बहुत ही सुंदर, किन्तु वास्तविकता कुछ ओर ही है. बधाई आदरणीय विजय प्रकाश जी

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 10, 2014 at 5:43pm

आ ० सन्देश नायक जी,
आपकी सराहना के लिए बहुत आभार.सादर.

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 10, 2014 at 5:42pm

आ ० वेदिका जी,
आपकी सराहना के लिए बहुत आभार.सादर.

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