For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - - - सुलभ अग्निहोत्री

कुछ ऐसे सिलसिले हैं जो हमेशा साथ चलते हैं
कुछ ऐसे फासले हैं जोकि यादों में ठहरते हैं

छुपे कुछ राज होते हैं हरेक पैगाम में उसके
कभी हम जान लेते हैं, कभी अनजान रहते हैं

सँदेशे दिल के आते हैं, हमेशा आँख के रस्ते
कभी गालों को तर करते, कभी नूपुर से बजते हैं

वो मेरे साथ ज्यादा रासता तय कर नहीं पाये
पर उतनी राह पर अब भी हजारों फूल खिलते हैं

उन्हें जब याद करते हैं तो कोई गीत होता है
ग़ज़ल होती है जब कोई, उन्हें हम याद करते हैं

वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 511

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 3:46pm

//वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं//

सांकल पर पडी थपकी से अगर श्याम की बंसी की तान सुनती हो - तो ये मोहब्बत की इन्तहा है साहिब। गज़ब का शेअर हुआ है।

Comment by Sulabh Agnihotri on September 18, 2014 at 3:28pm

बहुत-बहुत आभार harivallabh sharma जी !

Comment by harivallabh sharma on September 17, 2014 at 6:34pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल भाई Sulabh Agnihotri जी वाह...
वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं...सुन्दर ग़ज़ल हेतु badhai

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:19pm

बहुत-बहुत आभार  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:14pm

हुत-बहुत आभार laxman dhami जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:13pm

बहुत-बहुत आभार khursheed khairadi जी !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 17, 2014 at 11:42am

सुलभ जी

बहु बढ़िया गजल हुयी है i  मुबारक हो .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 17, 2014 at 10:53am

कुछ ऐसे सिलसिले हैं जो हमेशा साथ चलते हैं
कुछ ऐसे फासले हैं जोकि यादों में ठहरते हैं

आदरणीय सुलभ अग्निहोत्री जी बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकारें .

Comment by khursheed khairadi on September 17, 2014 at 9:19am

वो मेरे साथ ज्यादा रासता तय कर नहीं पाये
पर उतनी राह पर अब भी हजारों फूल खिलते हैं

आदरणीय सुलभ साहब मुकम्मल ग़ज़ल के खुबसूरत अशहार पर ढेरों दाद स्वीकार स्वीकार करें |वा...ह 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service