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ग़ज़ल...मुस्कुराना आ गया.

हौंठ सीं गर्दन हिलाना आ गया.
दोस्त ! जीने का बहाना आ गया.

जिन्दगी में गम मुझे इतने मिले,
अश्क पीकर.. मुस्कुराना आ गया.

ख्वाब सब आधे अधूरे रह गए,
दर्द सीने में ...बसाना आ गया.

दर्द के किस्से सुनाऊँ किस तरह,
गीत गज़लें गुनगुनाना आ गया.

साथ रहने का असर भी देखिये,
आप से बातें छिपाना आ गया.

हादसों ने पाल रख्खा है मुझे.
मौत से बचना बचाना आ गया.

बात मुद्दों पर नहीं हैं आजकल,
देखिये कैसा जमाना आ गया.

चीज हर बिकती मिली है इस शहर,
कीमतें मुझको चुकाना आ गया.

तू मिली तो दर्द गम सब छू हुए,
प्यार में पींगें बढ़ाना आ गया.
**हरिवल्लभ शर्मा 
दिनांक.08.09.2014

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 818

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 10, 2014 at 11:25am


जिन्दगी में गम मुझे इतने मिले,
अश्क पीकर.. मुस्कुराना आ गया.


दर्द के किस्से सुनाऊँ किस तरह,
गीत गज़लें गुनगुनाना आ गया.


हादसों ने पाल रख्खा है मुझे.
मौत से बचना बचाना आ गया.

बात मुद्दों पर नहीं हैं आजकल,
देखिये कैसा जमाना आ गया.....................वाकई यही हो रहा है 

चीज हर बिकती मिली है इस शहर,
कीमतें मुझको चुकाना आ गया.................बिलकुल सही  

तू मिली तो दर्द गम सब छू हुए,
प्यार में पींगें बढ़ाना आ गया................................बहुत बढ़िया रचना ..मेरि तरफ से हार्दिक बधाई सादर 

Comment by harivallabh sharma on September 10, 2014 at 12:17am

आदरणीय narendrasinh chauhan जी आपका हार्दिक आभार आपका अनुमोदन मिला..शुक्रिया.

Comment by harivallabh sharma on September 10, 2014 at 12:15am

जनाब शकील समर साहब ग़ज़ल पर हौसला अफजाई हेतु दिली शुक्रगुजार हूँ.

Comment by harivallabh sharma on September 10, 2014 at 12:14am

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव साहब आपकी स्नेहिल टीप हेतु हार्दिक शुक्रिया ..सादर 

Comment by harivallabh sharma on September 10, 2014 at 12:12am

आदरणीय Shyam Narayan Verma साहब आपके अनुमोदन हेतु हार्दिक शुक्रिया.

Comment by शकील समर on September 9, 2014 at 4:29pm

वाह, खूबसूरत गजल के लिए बधाई।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 9, 2014 at 1:16pm

हरिवल्लभ जी

इन ह्रदय-वल्लभ गजलो का शुक्रिया i

Comment by Shyam Narain Verma on September 9, 2014 at 9:54am
सुन्दर गज़ल .... सादर बधाई.....

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