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दीप आंधी में जलाना इतना आसाँ है नहीं

२१२२      २१२२     २१२२     २१२  

राह पर्वत पर बनाना इतना आसाँ है नहीं 

दीप आंधी में जलाना  इतना आसाँ है नहीं 

सरहदों पे जान देते आज माँ के लाडले 

गीत आजादी के गाना इतना आसाँ है नहीं 

दोस्ती का हाथ लेकर फिर खड़े अहबाब हैं 

जो दफ़न उसको जगाना इतना आसाँ है नहीं 

बस्तियां चाहें जला लें आप कितनी भी यहाँ 

है हकीकत घर बनाना इतना आसाँ है नहीं 

हाथ हाथों से मिलाये हर किसी ने बज्म में 

दिल से दिल को पर मिलाना इतना आसाँ है नहीं 

सरहदों पे दाग खूनी अब तलक सूखे नहीं 

प्रीत दुश्मन से जताना इतना आसाँ है नहीं 

गाँव यूं तो छोड़ आया था मैं बचपन में मगर 

छांव पीपल की भुलाना इतना आसाँ है नहीं 

.

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 27, 2014 at 7:06pm

सरहदों पे जान देते आज माँ के लाडले 

गीत आजादी के गाना इतना आसाँ है नहीं 

हाथ हाथों से मिलाये हर किसी ने बज्म में 

दिल से दिल को पर मिलाना इतना आसाँ है नहीं 

बहुत खूब लिखा आप ने। . आज के हालात का सटीक वर्णन
आभार
भ्रमर ५

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:41am
आदरणीय गिरिराज भाईसाब ..आपका प्रोत्साहन और मार्गदर्शन ऐसे ही मिलता रहे ..सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:36am
आदरणीय सौरभ सर ..आपकी प्रतिक्रियाओं से हमेशा ही कुछ और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है और मैं कोशिश भी करता हूँ ..आपकी साहित्यिक पैठ अत्यंत गहरी है इसलिए आपकी बातों को उतने गहराई से कई बार मैं समझ नहीं पता अपने इशारों को थोडा और आसान करने का कष्ट करें ..आपसे सदैव ही कुछ न कुछ सीखने को मिला है यह स्नेह बदस्तूर मिलता रहे इसी कामना के साथ सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:33am
आदरणीया राजेश जी ..आपसे हमेसा ही मुझे हौसला मिलता रहा है ..रचना पर आपकी प्रतिक्रियाएँ यूं ही मिलती रहे इसी कामना के साथ सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:31am
आदरणीय अजय जी ..आपके स्न्हेहिल उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:29am
आदरणीय राम शिरोमणि जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूँ सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:28am
आदरणीय लक्ष्मण जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए उत्साहवर्धक है ..भविष्य में भी आपका स्नेह यूं ही मिलता रहे इसी ख्वाइश के साथ सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 27, 2014 at 10:26am
आदरणीय जीतेन्द्र जी ..रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल बधाई सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 25, 2014 at 8:30pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल,  आदरणीय आशुतोष भाई , हार्दिक बधाई | आ. सौरभ भाई की बातों का ख्याल करें |

Comment by विजय मिश्र on August 25, 2014 at 6:38pm
बधाई भाई आशुतोषजी , बहुत अच्छी रचना |

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