For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हत्या ( अतुकांत चिंतन ) गिरिराज भन्डारी

कुछ ऐसी बात कह देना बे आवाज, महज़ इशारों से

जो नहीं कहनी चाहिये , किसी सूरत नहीं

या , कुछ ऐसी बात न कहना जिसे कह देना ज़रूरी है

किसी के भले के लिये ,खुशी के लिये , वो भी इसलिये

 

ताकि हम छीन सकें , किसी के होठों की हँसी

नोच सकें किसी के मन की शांति

उतार सकें , बिखरा सकें

विचारों के , भावों के समत्व को

अन्दर के प्यार को , ममत्व को  

छितरा सकें मन की शांति  

ताकि  टूट जाये , बिखर जाये किसी का व्यक्तित्व

किसी को कानो कान पता न चले और शिकार घायल

 

बिना किसी दृश्य हथियार के , ख़ामोश साजिशों से

निर्दोष सी लगने वाली क्रियाओं से

या सोद्देश्य निष्क्रियता से

 

ये सब भी एक हथियार ही हैं , ख़ामोश, अदृश्य , सटीक मारक शक्तियों से युक्त

कोई छोटी मोटी बात नहीं होती इसे हासिल करना

यूँ ही प्राप्त नही होती ये ख़ासियतें , शक्तियाँ

सतत अभ्यास की ज़रूरत होती है , साधना है ये भी

 

लेकिन, ये अच्छी बात है  

यह साधना भी अब दिख जाती है , यदा कदा  

बहुत हैं साधना रत , कुछ साध भी चुके हैं

क्योंकि, हर सफलता बधाई योग्य होती है , सकारात्मक हो या नकारात्मक

सो , बधाइयाँ , उन सभी को

एक बात और ,

हत्या केवल शरीर की हत्या को समझना अधूरी समझ है ,

क्या ऐसा नहीं है ?

***********************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

Views: 575

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 10, 2014 at 12:42am

आप कहाँ से कहाँ की बातें कर गये, आदरणीय गिरिराजभाईजी.

इस अदभुत तटस्थता के कारण ही सार्थक बिम्ब उभर पाये हैं. इसे यों ही बनाये रखें. कविता वाकई अच्छी हुई है.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2014 at 6:21pm

आदरणीय आशुतोष भाई , रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2014 at 6:20pm

आदरणीय अरुण अनंत भाई , आप तक बात पहुँच पाई तो कहना सार्थक हुआ । सराहना के लिये आपका दिली आभार ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 6, 2014 at 4:23pm

आदरणीय गिरिराज भाई साब ..आज बिलकुल अलग ही अंदाज में अप्पकी एक रचना से रूबरू होने का मौका मिला ..m..आध्यत्मिक और गूढ़ इस रचना के मधायमअ से आपने अनूठा सन्देश दिया है .मेरी तरफ से इस रचना पार हार्दिक बधाई सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2014 at 3:37pm

आदरणीय गिरिराज सर बहुत ही गहन अभिव्यक्ति चुपचाप बहुत कुछ कह दिया आपने इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2014 at 11:14am

आदरणीय सुशील सरना भाई , चिंतन के मुखर अनुमोदन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2014 at 11:13am

आदरणीय लक्ष्मण भाई , रचना को अपका अमूल्य समय देने के लिए और सराहना के लिये  आपका आभारी हूँ ॥

Comment by Sushil Sarna on July 5, 2014 at 7:50pm

१०० % सहमत हूँ आपके कथन से आदरणीय गिरिराज भंडारी जी  .... इस सुंदर और दिल को छूने वाली प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 5, 2014 at 10:33am

आ० भाई गिरिराज जी , यह सत्य है की हम केवल दैहिक हत्या को ही हत्या कहते हैं और निश्चित तौर पर हमारा ज्ञान ही है .साथ में यह भी सत्य है की जब  आत्माएं संवेदनहीन हो चुकी हों तो आत्मिक हत्या को हत्या कैसे समझा जा सकता है . बहरहाल इस सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई l


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 5, 2014 at 7:21am

आदरणीया राजेश जी , किंतन के केन्द्रीय भाव से सहमति के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service