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कुण्डलिया छन्द -- (पहला प्रयास )

लग कर छाती से हुए, बडे और बलवान
निज जननी के सामने, ठाडे सीना तान
ठाडे सीना तान , लाज आये ना उनको
बेशर्मी ली लाद , न भाये अपने मन को
आहत है माँ खूब, दुखी रातों में जगकर
चूसे मां का खून , पले जो छाती लगकर ||

मीना पाठक 
मौलिक अप्रकाशित 

Views: 645

Comment

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Comment by Meena Pathak on July 12, 2014 at 6:40pm

आदरणीय सौरभ सर हार्दिक आभार ..यूँ ही आशीष देते रहें | सादर 

Comment by Meena Pathak on July 12, 2014 at 6:39pm

आदरणीया  प्राची जी  हृदयतल से आभार स्वीकारें | सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 1:08am

ये पहला प्रयास है ! वाह !! .. फिर तो आप शतप्रतिशत अंकों से सफल हईं, आदरणीया.

शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 26, 2014 at 7:19pm

मर्मस्पर्शी कथ्य 

सुन्दर प्रस्तुति 

इस छान्दसिक प्रस्तुति पर मेरे दिली बधाई लीजिये आदरणीय मीना पाठक जी 

बहुत सुन्दर प्रयास हुआ है 

Comment by Meena Pathak on June 23, 2014 at 6:32pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी | सादर 

Comment by विजय मिश्र on June 23, 2014 at 12:49pm
कड़क प्रश्न करती कठोर धरातल पर रची गयी रचना , साधुवाद एवं बधाई भी |
Comment by Meena Pathak on June 23, 2014 at 12:13pm

आदरणीय लाडीवाला जी बहुत बहुत आभार | सादर 

Comment by Meena Pathak on June 23, 2014 at 12:10pm

आदरणीय शिज्जू जी.बहुत बहुत आभार | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 23, 2014 at 10:37am

प्रथम प्रयास में सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया मीना पाठक जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 23, 2014 at 9:07am

वाह प्रथम प्रयास ही बहुत अच्छा है बहुत बहुत बधाई एवम हार्दिक शुभकामनायें

कृपया ध्यान दे...

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