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चलो एक वृक्ष लगाएँ !

चलो एक वृक्ष लगाएं
करें पुण्य का काम
जो दे हम सब को
जीवन भर आराम
चलो एक वृक्ष लगाएं |

धरती माँ का गहना है ये
है ये उनका रूप श्रृंगार
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा
देता हमको जीवन दान
चलो एक वृक्ष लगाएं |

बरगद, पीपल, नीम, पाकड़
तुलसी, अक्षय, पारिजात
ये सब है उपहार प्रकृति का
मिला है सबको एक समान
चलो एक वृक्ष लगाएं |

जल का संग्रह करना है अब
सोच लें गर हम सब इक बार
वर्षा जल संचित कर के हम
भर लें जल भण्डार अपार
चलो एक वृक्ष लगाएं |

गंगा को मैली कर-कर के
किया है हमने जो अपराध
पुनः उसे स्वक्ष करने का
संकल्प लें, बढ़े हम साथ
चलो एक वृक्ष लगाएं |

मीना पाठक 
मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 731

Comment

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Comment by Meena Pathak on July 12, 2014 at 6:37pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ सर ...कभी मौका मिला तो इस रचना का सस्वर पाठ जरूर करुँगी | सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 12:36am

प्रस्तुति के लिए धन्यवाद, आदरणीया. इस अभिव्यक्ति को आपने सस्वर किया होता तो अंतर्निहित संदेश की आवृति और गहन हुई होती.

सादर

Comment by Meena Pathak on June 23, 2014 at 6:38pm

शुक्रिया बाबू 

Comment by Vindu Babu on June 23, 2014 at 9:19am

अच्छी और प्रासंगिक रचना की है आपने दीदी.

हार्दिक बधाई स्वीकारें।

सादर

Comment by Meena Pathak on June 23, 2014 at 7:40am

आदरणीय गिरिराज जी सादर आभार स्वीकारें 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 22, 2014 at 7:33pm
आ o सुश्री राजेश कुमारी जी , सुझाव अच्छा है ,रचना के अनुमोदन हेतु धन्यवाद .
सादर.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 7:26pm

आदरणीया मीना जी , पर्यावरण के लिये बहुत सुन्दर संदेश देती आपकी रचना के लिये बहुत बधाइयाँ ॥

Comment by Meena Pathak on June 22, 2014 at 5:49pm

आभार प्रिय जितेन्द्र | सस्नेह 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 22, 2014 at 9:59am

एक सुंदर सन्देश, बिलकुल सही समय पर बारिश आने ही वाली है, बधाई स्वीकारें आदरणीया मीना दीदी

Comment by Meena Pathak on June 21, 2014 at 10:14pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जवाहरलाल जी | सादर 

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