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मौन जब मुखरित हो जाता है (महेश्वरी कनेरी)

मौन जब मुखरित हो जाता है

मौन जब मुखरित हो

शब्दों में ढल जाता है

मिट जाते भ्रम सभी

मन दर्पण हो जाता है

मौन जब मुखरित हो जाता है…..

बोझिल मन शान्त हो

सागर सा लहराता है

वेदना सब हवा हो जाती

भोर दस्तक दे जाता है ।

मौन जब मुखरित हो जाता है…..

धैर्य मन का सघन हो

विश्वास सबल हो जाता है

पतझड़ मन बसंत बन

कोकिल सा किलकाता है ।

मौन जब मुखरित हो जाता है…..

सुखद अहसासों से भर

ह्रदय पुलकित होजाता है

विचारों में पंख लग जाते

नया इतिहास रच जाता है ।

मौन जब मुखरित हो जाता है…..

 

*****************

 

महेश्वरी कनेरी..मौलिक /अप्रकाशित

 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 30, 2014 at 4:51pm

इस सधे हुए प्रयास के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया

शुभेच्छाएँ

Comment by Maheshwari Kaneri on January 24, 2014 at 2:00pm
उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का आभार..

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 24, 2014 at 12:06pm

मौन की ओढनी ओढे मन की वाचालता जब प्राचीरें तोड़ मुखरित हो उठे तो अन्तः में जमी संवेदनाएं पिघल पिघल बहने लगती हैं और मन शांत हो ही जाता है.... इन भावों को सहजता से पिरोहा है आपने अपनी कविता में 

बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर आ० माहेश्वरी कनेरी जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 24, 2014 at 10:37am

आदरणीया गीत के प्रवाह में बहुत सुधार किया है आपने पुनः पढ़ने पर अधिक प्रसन्नता हुई पुनः बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 22, 2014 at 9:09pm

आदरणीया महेश्वरी जी , बहुत सुन्दर  गीत रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 22, 2014 at 7:51pm

वाह बहुत खूबसूरत गीत है आदरणीया महेश्वरी जी बहुत बहुत बधाई इस गीत के लिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 22, 2014 at 2:55pm

आदरणीया बहुत अच्छा प्रयास है अच्छी पंक्तियाँ बनी हैं प्रवाह में कमी है प्रयासरत रहें. इस प्रयास पर बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 22, 2014 at 6:55am

आदरणीय माहेश्वरी जी ,

 मौन को एक मुखर अभिव्यक्ति देने के लिए हार्दिक वधाई सीकर करें l

कृपया ध्यान दे...

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