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हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 
विद्या का तू उपहार दे माँ,

जीवन पथ पर बढ़ती जाऊँ, 
अपनों का विश्वास बनूँ माँ, 
अंधियारे को दूर भगा दूँ, 
ऐसी तेरी दास बनूँ माँ, 
तेरी महिमा जग में गाउँ , 
अधरों को तू उदगार दे माँ, 
हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 
विद्या का तू उपहार दे माँ,

मधु का स्वाद लिए है ज्यो अब, 
विष का भी मैं पान करूँ माँ, 
फूलों पर जैसे चलती हूँ, 
शूलों को भी पार करूँ माँ, 
तूफानों में राह बना लूँ, 
ज्ञान का तू भण्डार दे माँ , 
हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 
विद्या का तू उपहार दे माँ.. 

(Anita Maurya ) 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by Maheshwari Kaneri on January 17, 2014 at 1:29pm

 माँ शारदे की वंदना , बहुत सुंदर, अनीता जी

Comment by annapurna bajpai on January 16, 2014 at 6:01pm

  बहुत सुंदर माँ शारदे की वंदना , आ0 अनीता जी बधाई आपको । 

Comment by Anita Maurya on January 16, 2014 at 9:39am

Aap sab ka bahut bahut aabhar.. 

Comment by ram shiromani pathak on January 15, 2014 at 10:09am

आदरणीया अनिता जी , सुन्दर प्रस्तुति के लिये आपको हार्दिक बधाई ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 13, 2014 at 6:11pm

आदरणीया अनिता जी , सुन्दर प्रार्थना के लिये आपको हार्दिक बधाई ॥

Comment by coontee mukerji on January 12, 2014 at 10:00pm

सुंदर प्रस्तुतिकरण....हार्दिक बधाई. अनीता जी.

Comment by Meena Pathak on January 11, 2014 at 5:09pm

मधु का स्वाद लिए है ज्यो अब, 
विष का भी मैं पान करूँ माँ, 
फूलों पर जैसे चलती हूँ, 
शूलों को भी पार करूँ माँ, 
तूफानों में राह बना लूँ, 
ज्ञान का तू भण्डार दे माँ , 
हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 
विद्या का तू उपहार दे माँ.. ...............माँ शारदे की कृपा बनी रहे प्रिय अनीता .. कलम यूँ ही चलती रहे ,, बहुत बहुत बधाई | सस्नेह 

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