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कविता : - केवल तूने ही नहीं खाईं गोलियाँ ..

कविता : -केवल तूने ही नहीं खाईं गोलियाँ ..

बापू केवल तूने ही नहीं

अपने सीने पर खाईं गोलियाँ

और कहा हे राम !

आज जब जब कोई चलता तुम्हारी राह

देश हित होती उसकी चाह

मिलती उसे कराह

ज़िंदा जलाया जाता है उसे

गोलियाँ भी मारी जाती हैं

और तुम्हारा रामराज का सपना

जाने कब का टूट

और पीछे छूट  चुका

अब तो व्यवस्था भी बेबस दिखती

जाने किन हांथों बिकती

तेरे बहुजन राम भरोसे

उनकी हर रोटी

कई टुकड़ों में बंटती

और झोपड़ी तक आते आते

नहीं बंचती

हम कलमकार

लगता हुए बेकार

आज शब्द अंगारे उगलते है

मगर जलते नहीं वो

जिनकी चमड़ी हो गयी है

बेहद मोटी

शैतानों सी

वे मानव हैं

या आदिमानव

या उससे भी बद्तर

बापू !

नाथूराम आज भी चलाते जा रहा है

चौथी - पांचवी - छठी...

निरंतर गोलियाँ

उनके सीने पर

जिन्हें तुम्हारे आदर्श

लुभाते ही नहीं रास्ता दिखाते हैं

बापू इसी लिये कहता हूँ

सिर्फ तुमने ही नहीं खाईं गोलियाँ

सिर्फ तुमने ही नहीं कहा

हे राम !!!


 

 

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on February 6, 2011 at 10:50am
अक्षय ठाकुर जी आपके शब्दों के लिये आभारी हूँ |स्नेह बनाए रखिये |
Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on February 6, 2011 at 9:54am
कविता के माध्यम से भारत की वर्तमान दशा का प्रत्यक्ष वर्णन किया है आपने.. बधाई स्वीकार करें :)
Comment by Abhinav Arun on January 30, 2011 at 9:38pm
शुक्रिया राकेश जी !!
Comment by Abhinav Arun on January 28, 2011 at 1:55pm
आदरणीया वंदना जी , सर्वश्री वीरेंद्र जी ,वीनस जी ,नवीन जी ,शेष जी ,आशीष जी ,गणेश जी ,विवेक जी आप सब ने मेरा हौसला बढ़ाया आभारी हूँ | जब अपनी बात औरों तक पहुंचकर उनकी प्रशंसा पाती है तो अच्छा लगता है और दायित्व बोध भी होता है| और भी अच्छा करने का निरंतर प्रयास रहेगा |
Comment by Veerendra Jain on January 28, 2011 at 11:11am
अरुणजी ...आज की दशा का बिलकुल सटीक वर्णन किया है आपने , दिल को छू लेने वाली रचना के लिए हार्दिक बधाई..
Comment by वीनस केसरी on January 28, 2011 at 1:47am
विचारोत्तेजक कविता


नाथूराम आज भी चलाते जा रहा है
चौथी - पांचवी - छठी...
निरंतर गोलियाँ
उनके सीने पर
जिन्हें तुम्हारे आदर्श
लुभाते ही नहीं रास्ता दिखाते हैं
बापू इसी लिये कहता हूँ
सिर्फ तुमने ही नहीं खाईं गोलियाँ
सिर्फ तुमने ही नहीं कहा
हे राम !!!

खूब पसंद आई
Comment by आशीष यादव on January 27, 2011 at 2:46pm
अरुण सर एक मर्म स्पर्शी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई| सच आपने एक खुबसूरत सच लिखा है| आज भी नाथू ख़त्म नहीं हुए| आज भी लुटने वाले काले गोरे अभी ख़त्म नहीं हुए| राम राज धरा रह गया|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2011 at 11:32pm
बेहद खुबसूरत रचना , ह्रदय को छू लेने वाली काव्य कृत प्रस्तुत किया है आपने, आपने सही कहा है गाँधी जी को तो एक नाथू राम ने मारा यहाँ तो पग पग पर कितने नाथू राम भरे पडे है | गणतंत्र और खुबसूरत कविता पर बधाई अरुण जी |
Comment by विवेक मिश्र on January 26, 2011 at 10:35pm
एक मर्मस्पर्शी रचना और साथ ही सटीक छायाचित्र संयोजन. शुभकामनायें स्वीकार करें.
Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 8:17pm

मुझे अभी अभी इसे सजीव ओ.बी.ओ. पर लिख कर बहुत संतोष हुआ ! और मन से एक बोझ उतरने का एहसास भी | अपनी बात कह लेने का एक मंच देने के लिये ओ.बी.ओ. को हार्दिक धन्यवाद | जीवन की एक कमी पूरी हुई इस साईट से जुडकर |पूरी टीम को शुभकामनाएं !!!!

सृजन रथ चलता बढ़ता रहे खूब नाम कमाए अपना ओ.बी.ओ. |

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