For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : रखना ख्याल

रखना ख़याल शह्र का मौसम बदल न जाय
जुल्मत कहीं चराग़ की लौ को निगल न जाय

आमादा तो है नस्लकुशी पर अमीरे शह्र
डरता भी है कि उसका पसीना उबल न जाय

अजदाद से मिला जो असासा बचाके रख
मुट्ठी में सुखी रेत की तरह फ़िसल न जाय

तस्वीर तेरी देखकर कुछ ग़मज़दा हूँ मैं
इक दिन तेरे शबाब का सूरज ये ढल न जाय

हरगिज न आप जाइये साहिल के आस पास
डर है शवाए हुस्न से दरिया उबल न जाय

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 855

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Thakur on September 6, 2013 at 11:25am

जिंदाबाद !जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद !

once again  जिंदाबाद ! sab jee

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on September 6, 2013 at 6:13am

जिंदाबाद !जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! जिंदाबाद !

Comment by Sushil Thakur on September 2, 2013 at 6:46pm

 आ.Saurabh sab, Rajesh Kumari Mam, Vinas Sab, Ashutosh Sab  बहुत बहुत शुक्रिया।  

Comment by Abhinav Arun on September 2, 2013 at 7:18am

बेहतरीन ग़ज़ल हुई है आ. सुशील जी हर शेर बोल रहा है जिंदाबाद ! इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें !

Comment by वीनस केसरी on September 2, 2013 at 3:57am

वाह ... वागर्थ में प्रकाशन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें
आपने यदि तर्ह २१ के वज्न में बाँधा है तो एक बार नज़ारे सानी फरमा लें मिसरा बेबहर हो जा रहा है ...

Comment by Sushil Thakur on September 1, 2013 at 6:05pm

Dharmendra sab, Arun Sab, Vandana Mam, Vinas Sab.Vijayshree Mam, Ashutosh Sab, Jitendra Sab, shyam sab, annapurna Mam, Giriraj Sab n all respected

आ. हौसला अफज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।  ग़ज़ल की सराहना जिस अंदाज़ में आप सब ने की है, मेरे पास शुक्रिया के लब्ज़ नहीं।  वीनस साब , तरह को मैंने तर-ह के जैसे कहा है।  एक सूचना आप से  आदान प्रदान करते हर्ष हो रहा है , आप सब की शुभकामनाओं की बदौलत 'वागर्थ' के इस अंक में मेरी दो ग़ज़लें आईं हैं। सादर

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 1, 2013 at 12:58pm

अच्छे अश’आर हुये हैं सुशील जी, बधाई स्वीकारें

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 1, 2013 at 12:28pm

वाह वाह लाजवाब लाजवाब लाजवाब दिल को छू लेने वाले अशआर वाह वाह बधाई स्वीकारें.

Comment by vandana on September 1, 2013 at 6:36am

बहुत शानदार ग़ज़ल है बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by वीनस केसरी on September 1, 2013 at 2:09am

वाह वा जनाब
एक बार फिर से आपकी शानदार ग़ज़ल ने लाजवाब कर दिया

इसके बाद तो बाद यही दोहराते बनता है ... जिंदाबाद जिंदाबाद

एक लफ़्ज़ पर मुझे आपसे इस्लाह की दरकार है ...
मैंने "तरह" लफ़्ज़ को "हरा" के वज्न में भी देखा है और और "राह" के वज्न में भी और सभी इन् दोनों को जाइज मानते हैं मगर आपने "हारा" के वज्न में बांधा है क्या यह अरूज के हवाले से जाइज है ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
50 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
1 hour ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार,  प्रदत्त  चित्र पर आपने सुन्दर चौपाइयाँ…"
12 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"दिल रुलाना नहीं कि तुझ से कहें हम ज़माना नहीं कि  तुझ से कहें । अच्छा शेर हुआ। ज़माना तो…"
12 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वो तराना नहीं कि तुझ से कहें आशिक़ाना नहीं कि तुझ से कहें । यह शेर कहता है कि यह तराना आशिक़ाना…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह मेरी बेध्यानी का परिणाम है, मुझे और सतर्क रहना पड़ेगा। "
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह तो ऋचा जी की ग़ज़ल पर कहा था, यहॉं न जाने कैसे चिपक गया। आपकी ग़ज़ल अभी पढ़ी नहीं है।"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"मुझे लगता है कि मूल ग़ज़ल के शेर की विवेचना यह समझने में सहायक होगी कि ऐसी कठिन ज़मीनों पर शेर कैसे…"
13 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय तिलक जी नमस्कार  बहुत बहुत आभार आपका इतनी बारीक़ी से  हर एक बात बताई आपने और बेहतर…"
14 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service