For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रेम के विशाल बटवृक्ष 
जिसमें भावनाओं की गहरी 
जड़ें और यकीन की 
मजबूत साखें
उसमें झूमता है 
इठलाता है 
सब्ज़ दिल 

रिवाजों और रस्मों की 
तेज आँधियाँ भी 
बेअसर होती हैं इस 
विशाल वृक्ष के आगे
जब यकीन के मजबूत तने में 
तना होता है दिल

लेकिन 
शक की दीमकों ने
आहत कर दीं 
वो भावनाओं की जड़ें 
धीरे धीरे 
खोखला कर दिया 
आज इस बटवृक्ष को

और मजबूरियाँ ठगने का 
साधन जिसकी बाढ़ 
वृक्ष के अगल बगल से 
हटाती रिश्तों की माटी को 
और कामयाब हो भी जाती है 
क्यूंकी रिश्ते बोने होते हैं 
गहरी भावनाओं और 
यकीन के आगे
रिश्ते झूठे हैं 
बह जाते हैं बाढ़ में 

और टूट पड़ता है दिल 
इस वृक्ष की खोखली 
हो चुकी यकीन की 
साखों से 
तड़पता हुआ 
वेदना से भरा
किंतु शून्य नहीं 

अपने शनैः शनैः क्षीण होने को 
आँकता है 
स्वयं को टटोलता है 
किंतु 
फिर जुड़ता नहीं 
उस खोखले हुए 
वृक्ष से जो 
अब गिर चुका है 
स्वयं की नज़रों से
भावनाओं को आहत कर और 
यकीन तोड़ के 
प्रेम अब नहीं रहा 
तो फिर दुख भी नहीं 
जब रिश्ता ही नही 
तो दुख कैसा

लेकिन दिल ठगता है 
खुद को 
करता है ढोंग 
उसके तिल तिल पीले पड़ने तक 
फिर सड़ने तक 
छी थू है 
ऐसे प्रेम पर 
जो दीमकों को न्योता देती हैं 
कुछ तो सीखो विज्ञान से कोई 
एंटीदीमक कोई विष 
कुछ तो इस्तेमाल करना था 
काश दिल के पास भी 
दिमाग़ होता 
बेचारा 
प्रेम के भरोशे मारा गया

संदीप पटेल "दीप"

Views: 598

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 6, 2013 at 8:48am

सुन्दर रचना.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2013 at 10:50pm

एक अच्छी रचना होते-होते रह गयी. इतना ही कहूँगा. वैचारिक संप्रेषणों में थोड़ीभी वाचालता प्रभाव मेट देती है.

प्रारम्भ के दो बंद अत्यंत समृद्ध हैं. ऊहापोह को साझा करते हुए, कि, भावनाओं का सैलाब अनियंत्रित शब्दों में ढलने लगता है. 

आपका प्रयासरत रहना आशस्त करता है, आदरणीय.

शुभ-शुभ

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 31, 2013 at 11:02am

आदरणीय केवल प्रसाद जी,  आदरणीय राम भाई,  आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, आदरणीय विजय सर जी , आदरणीया कुंती जी आदरणीया डॉ प्राची  जी   आप सभी का रचना कर्म को सरहाने हेतु हृदय से आभारी हूँ स्नेह यूँ ही बनाए रखिए सादर 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2013 at 9:35pm

आ0 संदीप भाई जी, वृक्ष से जो
अब गिर चुका है
स्वयं की नज़रों से
भावनाओं को आहत कर और
यकीन तोड़ के
प्रेम अब नहीं रहा
तो फिर दुख भी नहीं
जब रिश्ता ही नही
तो दुख कैसा.... अतिसुन्दर प्रस्तुति। हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by vijay nikore on May 30, 2013 at 5:43pm

गहन और उदात्त भाव हैं आपकी इस रचना में। साधुवाद!

सादर,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 7:45pm

शक की दीमक प्रेम से हरे भरे रिश्तों को कैसे खोखला कर जाती हैं और छोड़ जाती है एक तड़प... 

काश दिल के पास भी 
दिमाग़ होता 
बेचारा ..................सुन्दर शब्द !

अभिव्यक्ति पर हार्दिक शुभकामनाएँ 

Comment by Shyam Narain Verma on May 29, 2013 at 4:49pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by ram shiromani pathak on May 29, 2013 at 3:39pm

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति हुई है आदरणीय भाई जी ///हार्दिक बधाई 

Comment by coontee mukerji on May 29, 2013 at 2:07pm

संदीप जी , बहुत ही सुंदर और मुखर अभिव्यक्ति  की है .अगर देखा जाए तो हर दिल  का यहीं हाल है .........काश दिल के पास भी
दिमाग़ होता
बेचारा
प्रेम के भरोशे मारा गया..........अति सुंदर  / सादर  /  कुंती .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service