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आज फिर उसका मन व्यथित था
हाहाकार कर रहा था हृदय
एक कथित पुरुष में
हैवान साकार हुआ था फिर.. 
फिर हैवानियत जीत गई थी 
नरपिशाच के पंजों में
आ गई थी 
फिर एक नन्ही /मासूम सी 
गुड़िया 
आज फिर उसने
अख़बार छिपाया.. 
टीवी के केबल 
निकाल दिये..
उसके भी घर मे  
एक गुड़िया है 
उससे आँख जो मिलानी है..!

आख़िर वह भी तो
एक मर्द है....
"मौलिक व अप्रकाशित" 
पिछला पोस्ट => तुम कैसे श्रेष्ठ ?

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 13, 2013 at 8:25am

विवेक भाई, आपके कहे से सहमत हूँ , कुछ वैसी ही परिस्थितियों में इस कविता ने जन्म ली, आपकी टिप्पणी बहुमूल्य है, बहुत बहुत आभार । 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 13, 2013 at 8:23am

प्रिय आशीष नैथानी जी, कविता के भावों को सराहने और रचना पसंद करने हेतु आभार । 

Comment by विवेक मिश्र on August 13, 2013 at 12:30am
बाग़ी भाई - सच कहूँ तो पिछले दिनों की हृदय झकझोर देने वाली घटनाओं के बाद से स्वयं को पुरुष कहते हुए भी एक अजीब सा संकोच होता है। शायद इसी कारण आपकी इस सशक्त कविता से इतना जुड़ाव अनुभव कर रहा हूँ। फ़िलहाल, भीतर तक झकझोरती हुई इस कविता के सृजन पर हृदय से साधुवाद देता हूँ।
Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 13, 2013 at 12:08am
आज फिर उसने
अख़बार छिपाया.. 
टीवी के केबल 
निकाल दिये..
उसके भी घर मे  
एक गुड़िया है 

उससे आँख जो मिलानी है..!

कविता का सम्पूर्ण भाव इन पंक्तियों में समाया हुआ है |  आज का एक सच |
बढ़िया कविता आदरणीय बागी जी  |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 12, 2013 at 11:13pm

आपका बहुत बहुत आभार अमन कुमार जी । 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 12, 2013 at 11:12pm

बहुमूल्य टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया डॉ नूतन गैरोला जी । 

Comment by aman kumar on May 31, 2013 at 5:57pm
उसके भी घर मे  
एक गुड़िया है 
उससे आँख जो मिलानी है..!

 हम सब को ही आंख मिलनी है या झूखानी  है ,घर पर -बहार सब जगह !  

Comment by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on May 31, 2013 at 5:23pm

आज के समाज का छिपा काला चेहरा .. कहाँ कहाँ छिपाए फिरेगा ... अपने घर मे नजर दो चार क्या करेगा ... 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 28, 2013 at 9:34am

बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रदीप कुशवाहा जी । 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 5, 2013 at 6:23pm

उत्साहवर्धन हेतु ह्रदय से आभार स्वीकार करें आदरणीया रेखा जोशी जी ।

कृपया ध्यान दे...

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