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ना उनके हो सके हम वो मेरे हो न पाये(गज़ल)

जिस ख्वाब की बदौलत ताउम्र सो न पाये

ना उनके हो सके हम वो मेरे हो न पाये

 

बादल ने पलकें भींची मौसम के आंसू छलके

पर सुर्ख दग्ध धरती के दाग धो न पाये

 

पैग़ाम दे गया वो सरहद पे मरते- मरते

कुर्बानियो पे मेरी आँखें भिगो न पाये

 

चाहा भले सभी ने बरबाद मुझको करना

सरसब्ज़  हसरतों की कश्ती डुबो न पाये

 

कुदरत को जालिमो ने इस तरह से सताया

ना हँस  सके परिन्दे अब्रपार रो न पाये

 

 

मायूस तू न होना किस्मत पे रख भरोसा

इक रोज़ पा सकेगा इस बार जो न पाये

 

तू मुझको जिंदगी दे या फिर मुझे कज़ा दे

परवर दिगार मेरा ईमान खो न पाये

********************************

'राज'

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 31, 2013 at 11:49am

प्रिय अरुन शर्मा आपको गज़ल पसंद आई तहे दिल से शुक्रिया|

Comment by अरुन 'अनन्त' on March 31, 2013 at 11:25am

आदरणीया सादर प्रणाम, लाजवाब अशआरों से सुसज्जित उम्दा ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई के साथ साथ ढेरों दाद कुबूल फरमाएं.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 31, 2013 at 11:12am

आदरणीय सौरभ जी आपकी प्रतिक्रिया सर आँखों पर कोई भी अशआर आपके दिल को छू सका ये मेरी कलम के लिए फख्र की बात है तहे दिल से शुक्रिया| 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 31, 2013 at 11:03am

आदरणीया राजश कुमारीजी,  आपकी ग़ज़ल बड़े कैनवास की हक़दार है. सभी अश’आर छू गये.

फिर भी मझे जाने क्यों बार-बार लगता है इस ग़ज़ल को थोड़ा और पगना था.

चाहा भले सभी ने बरबाद मुझको करना
सरसब्ज़ हसरतों की कश्ती डुबो न पाये.. . दिल के बहुत करीब हुआ है यह शेर.

एक बेहतर कोशिश पर ढेर सारी दाद कुबूल फ़रमायें.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 31, 2013 at 10:53am

आदरणीय लक्ष्मण जी आपको गज़ल अच्छी लगी तहे दिल से आभारी हूँ |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 31, 2013 at 10:45am

उम्दा गजल के लिए बधाई ख़ास तौर से ये शेर बहुत भाया -

तू मुझको जिंदगी दे या फिर मुझे कज़ा दे

परवर दिगार मेरा ईमान खो न पाये


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 31, 2013 at 9:01am

श्री राम जी तहे दिल से शुक्रिया|

Comment by श्रीराम on March 31, 2013 at 8:57am
सुंदर प्रस्तुति ... बहुत-बहुत बधाई

कृपया ध्यान दे...

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