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तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है

तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है,
तुम रक्त पात करते रहो, हम अपना लहू बहाने बैठे है,

तुम हिंसा को ही धरम मानते,हम अहिंसा के मतवाले है,
तुम दोनों गालो पर मारते रहो,हम तो गाँधी को मानने वाले है,
हर बार पीठ पर तुमने वार किया, फिर भी हम सीना ताने बैठे है,
तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है,

तुम पडोसी धरम निभा न सके, हम भाई धरम निभाते है,
तुम फ़ौरन हमला कर देते, जब हम वार्ता के लिये बुलाते है,
तुम नफरत की आग उगलते हो,हम ताज सजाये बैठे है,
तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है,

हम पकडे गये दुश्मनों को भी,जहाँ कहा वहां पहुचा दिया,
अफजल,कसाब को भी रखे है, तुमने ही अबतक कुछ नहीं किया,
इक विमान अपहरण कर,ले जाओ, हम आस लगाये बैठे है,
तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है,

हम भारत के कर्णधार, हम निति निर्धारण करते है,
हमारा नहीं कुछ बिगडने वाला,इसलिये नहीं किसी से डरते है,
हर बार मूर्ख बनते भारत के भोले लोग,इस बार भी बनने को बैठे है,
तुम गोली चलाते आ जाओ, हम तो गले लगाने बैठे है,
तुम रक्त पात करते रहो, हम अपना लहू बहाने बैठे है,

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Comment by विवेक मिश्र on July 15, 2011 at 11:49pm
ज्वलंत मुद्दे पर करारा व्यंग्य गीत. 'हम तो भई जैसे हैं, वैसे रहेंगे' की तर्ज पर हम लोगों ने जिस तरह अपनी आँखें बंद कर रखी हैं, उस पर निशाना साधती इस रचना के लिए हार्दिक बधाई.
जय हो!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 14, 2011 at 6:18pm
शन्नो दीदी, सराहना हेतु आभार |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 14, 2011 at 6:17pm
आदरणीया रंजना सिंह जी , रचना पसंद करने हेतु आपका बहुत बहुत आभार |
Comment by Shanno Aggarwal on July 14, 2011 at 2:25pm
अहिंसा को अपनाने वाले देश की सहनशक्ति पर बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने, गणेश, बधाई !
Comment by रंजना सिंह on July 14, 2011 at 12:36pm

 

Bahut sahi kaha....

Murda koum isse jyada aur kuchh kar bhi kya sakti hai....


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 11, 2010 at 8:47pm
Bahut Bahut Dhanyabaad , Bhai Kamlesh Jee,
Comment by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on June 11, 2010 at 8:19pm
वाह..!! क्या संयोग है ,गणेश जी ,भावना भी सन्दर्भ भि.बहुत बढ़िया तमाचा मारा है.इस राज तंत्र पर..बधाई
Comment by shailendra kr. singh on June 7, 2010 at 9:27pm
GANESH JI ,

KUCH AUR RACHNAYEN APNI BHEJE HAME. ACHHA LAGEGA. DHANYAWAAD.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 7, 2010 at 8:49pm
Suman jee, Preetam jee,Yograj bhaiya,Guru jee,Amrendra bhai, Ratnesh bhai,Raju bhai aur Shailendra Bhaiya ko hausala afjaai key liyey bahut bahut dhanyabaad,
Comment by shailendra kr. singh on June 7, 2010 at 8:27pm
SUNDAR RACHNA HAI , ISE BHARAT SARKKAR (mantralya) KO BHI YEH RACHNA BHEJE. THANK U.

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