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मेरी मुहब्बत थोरी जुदा हैं ,

मेरी मुहब्बत थोरी जुदा हैं ,
मेरा ये दिल तुमपे फ़िदा हैं ,
तेरी अदा मुझको तो भाए ,
तेरी सूरत मन में सजाये ,
तुही तो अब मेरा खुदा हैं ,
मेरी मुहब्बत थोरी जुदा हैं ,

तेरे लिए ही जीना ,
तेरे लिए ही मरना ,
जब तक हैं जीवन ,
तुमसे ही प्यार करना ,
प्यार तू करले प्यार ,
प्यार तू करले यार ,
कातिल बड़ी तेरी अदा हैं ,
मेरी मुहब्बत थोरी जुदा हैं ,

मैं तो ये कहना चाहू ,
बात मेरी मान जा ,
दिल मेरा क्या चाहे ,
ये तो पहचान जा ,
चाहे तू ना करे प्यार ,
चाहत में देदु जान ,
तुमसे ये मेरी वादा हैं ,
मेरी मुहब्बत थोरी जुदा हैं ,

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Comment

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Comment by Admin on May 7, 2010 at 10:18pm
गुरू जी आप का जबाब नही है, आप से कोई बिषय अछुता नही है, आप गम्भीर बिषय पर जितनी सहजता से लिखते है, उतना ही सहजता से प्रेम बिषय पर भी लिख लेते है, यही सब खुबी आप को खाश़ बनाती है, श्रीगार रस से ऒत प्रोत आपने बहुत अच्छी कविता लिखा है,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 7, 2010 at 9:09pm
waah guru jee waah.......bahut shaandar aur lajawab......
aapki mohabbat jatane ka tarika hi sabse juda hai....
aapke kavita likhne ka tarika thoda nahi sabse juda hai....
aapke dwara openbooks itni accha rachna prapt kar raha hai iske liye to aap sabse juda hai...isliye guru jee aapki mohabbat thoda nahi sabse juda hai..

bahut badhiya guru jee aisehi likhte rahe....sach puchiye to aapki rachna padhne aur sunne ki aadat si ho gayi hai...agar kisi din aapki rachna nahi aati hai to man vyakul ho jata hai ki aakhir aaj guru jee ki rachna kyu nahi aayi.....
bahut bahut dhanyabaad guru jee ee rachna khatir.........
aur sabse antim me ek baat aur kahna chahunga ki aapki mohabbat to juda hai hi lekin aap sabse juda hai.........

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 7, 2010 at 8:16pm
गुरु जी, आपकी मुहब्बत ही नहीं आपकी शैली भी सब से "थोरी जुदा" है ! अच्छा प्रयास है !

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