देश हमारा
देश हमारा कितना प्यारा , बोलें सब मीठी बोली ।
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई , सब मिलकर खेलें होली ।
बहती रहतीं पावन नदियाँ , सबकी भरतीं हैं झोली ।
हरे भरे फसल उगाकर ही , लोग मानते रंगोली ।
मुकुट जिसका हिमालय जैसा , ऐसा देश हमारा है ।
जिसका पांव पाखरे निसदिन , हिन्द सागर की धारा है ।
वेष भूषा अलग अलग है , अलग अलग ही है बोली ।
सभी लोग आदर करते हैं , एक रहे चाहे टोली ।
देश की शान पर मरते हैं , ऐसा देश हमारा है ।
विश्व विजयी तिरंगा झंडा , हम सब को ही प्यारा है ।
भारत सदा ही फले फूले , यहीं हमारा नारा है ।
वर्मा देश जान से प्यारा , सब कुछ इस पर वारा है ।
श्याम नारायण वर्मा
Comment
आदरणीय श्याम नारेन वर्मा जी सादर, हर्गीतिका सम १६,१४ मात्रा पर आधारित देशभक्ति पर रची सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.
verma ji deshbhakti ki sunder rachna badhai
देशप्रेम भाव से रचित इस कविता पर बधाई श्याम नारायण वर्मा जी
अच्छी कोशिश
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